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उर्दू को हटाने के पीडीपी के दावे बेबुनियाद : नेकां
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श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के प्रांतीय अध्यक्ष (कश्मीर) शौकत अहमद मीर ने उर्दू को हटाने के पीडीपी के दावों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह भाषा इस क्षेत्र के पाठ्यक्रम और प्रशासन का एक अहम हिस्सा बनी रहेगी। पार्टी मुख्यालय नवा-ए-सुबह में पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए मीर ने कहा कि नेकां के नेतृत्व वाली सरकार पिछली पीडीपी सरकार के विपरीत अपने आकाओं को खुश करने के लिए फैसले नहीं लेती है। हमारी सरकार का हर फैसला जम्मू और कश्मीर के हितों, जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है।
पीडीपी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अपने आकाओं को खुश करने के लिए सरफेसी एक्ट और जीएसटी लागू किया था। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। इसके विपरीत नेकां ने ऐसे मनमाने कदम न तो पहले कभी उठाए हैं और न ही भविष्य में कभी उठाएगी।
मीर ने पीडीपी पर यह भी आरोप लगाया कि वह राज्यसभा चुनावों में भाजपा को दिए गए अपने समर्थन से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उर्दू के मुद्दे पर बेवजह हंगामा खड़ा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम या भर्ती प्रक्रियाओं से उर्दू को हटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने उर्दू की अहम भूमिका पर जोर दिया खासकर राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में। इसके चलते इसमें कोई भी बदलाव करना अव्यावहारिक होगा।
उन्होंने कहा कि उर्दू शिक्षा और भर्ती दोनों ही ढांचों का एक अभिन्न अंग बनी हुई है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव करने की कोशिश से प्रशासनिक कामकाज में बाधा उत्पन्न होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी पंचायत और नगरपालिका चुनावों की तैयारी करने का आग्रह करते हुए मीर ने ऐसे सक्षम, शिक्षित और विश्वसनीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के महत्व पर जोर दिया जो जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित हों।
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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह भाषा इस क्षेत्र के पाठ्यक्रम और प्रशासन का एक अहम हिस्सा बनी रहेगी। पार्टी मुख्यालय नवा-ए-सुबह में पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए मीर ने कहा कि नेकां के नेतृत्व वाली सरकार पिछली पीडीपी सरकार के विपरीत अपने आकाओं को खुश करने के लिए फैसले नहीं लेती है। हमारी सरकार का हर फैसला जम्मू और कश्मीर के हितों, जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है।
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पीडीपी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अपने आकाओं को खुश करने के लिए सरफेसी एक्ट और जीएसटी लागू किया था। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। इसके विपरीत नेकां ने ऐसे मनमाने कदम न तो पहले कभी उठाए हैं और न ही भविष्य में कभी उठाएगी।
मीर ने पीडीपी पर यह भी आरोप लगाया कि वह राज्यसभा चुनावों में भाजपा को दिए गए अपने समर्थन से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उर्दू के मुद्दे पर बेवजह हंगामा खड़ा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम या भर्ती प्रक्रियाओं से उर्दू को हटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने उर्दू की अहम भूमिका पर जोर दिया खासकर राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में। इसके चलते इसमें कोई भी बदलाव करना अव्यावहारिक होगा।
उन्होंने कहा कि उर्दू शिक्षा और भर्ती दोनों ही ढांचों का एक अभिन्न अंग बनी हुई है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव करने की कोशिश से प्रशासनिक कामकाज में बाधा उत्पन्न होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी पंचायत और नगरपालिका चुनावों की तैयारी करने का आग्रह करते हुए मीर ने ऐसे सक्षम, शिक्षित और विश्वसनीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के महत्व पर जोर दिया जो जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित हों।
