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Srinagar News: महबूबा ने लोगों से पेड़ लगाने की अपील की
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महबूबा मु्फ्ती पौधरोपण करती हुईं।
- फोटो : shrinagar news
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श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को इस्लामी शिक्षाओं और कश्मीरी आध्यात्मिक परंपरा का हवाला देते हुए पेड़ लगाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से पर्यावरण की रक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की अपील की।
श्रीनगर में अपने पार्टी कार्यालय में पेड़ लगाने के अभियान के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मुफ्ती ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जड़ें धर्म और स्थानीय सांस्कृतिक ज्ञान में गहरी हैं।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ने पेड़ लगाने के महत्व पर जोर दिया था और उन्हें जीवन और गुजारे का स्रोत बताया था। उन्होंने कहा कि पौधे और जंगल ही जीवन हैं। हमारा धर्म हमें प्रकृति की रक्षा करने और उसे संवारने की सीख देता है। उन्होंने पेड़ लगाने के प्रयासों में लोगों से ज्यादा से ज्यादा भाग लेने की अपील की।
उन्होंने कश्मीर के संत शेख-उल-आलम जिन्हें नुंद ऋषि के नाम से भी जाना जाता है, की शिक्षाओं का भी जिक्र किया। एक मशहूर कहावत कही, ‘’’’अन पोशी तेली येली वन पोशी’’’’ जो जंगलों और खाद्य सुरक्षा के बीच के जुड़ाव को दर्शाती है। 15वीं सदी के संत-कवि से जुड़ी इस कहावत का मतलब है, ‘’’’खाना तभी तक रहेगा जब तक जंगल रहेंगे’’’’, जो इंसानों और प्रकृति के बीच की पारिस्थितिक निर्भरता पर जोर देती है। मुफ्ती ने कहा कि पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों और घटते जंगल क्षेत्र को देखते हुए ऐसी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। पीडीपी प्रमुख ने पार्टी कार्यालय में पेड़ लगाने के अभियान की अगुवाई की। इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने इस पहल के तहत पौधे लगाए।
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महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ने पेड़ लगाने के महत्व पर जोर दिया था और उन्हें जीवन और गुजारे का स्रोत बताया था। उन्होंने कहा कि पौधे और जंगल ही जीवन हैं। हमारा धर्म हमें प्रकृति की रक्षा करने और उसे संवारने की सीख देता है। उन्होंने पेड़ लगाने के प्रयासों में लोगों से ज्यादा से ज्यादा भाग लेने की अपील की।
उन्होंने कश्मीर के संत शेख-उल-आलम जिन्हें नुंद ऋषि के नाम से भी जाना जाता है, की शिक्षाओं का भी जिक्र किया। एक मशहूर कहावत कही, ‘’’’अन पोशी तेली येली वन पोशी’’’’ जो जंगलों और खाद्य सुरक्षा के बीच के जुड़ाव को दर्शाती है। 15वीं सदी के संत-कवि से जुड़ी इस कहावत का मतलब है, ‘’’’खाना तभी तक रहेगा जब तक जंगल रहेंगे’’’’, जो इंसानों और प्रकृति के बीच की पारिस्थितिक निर्भरता पर जोर देती है। मुफ्ती ने कहा कि पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों और घटते जंगल क्षेत्र को देखते हुए ऐसी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। पीडीपी प्रमुख ने पार्टी कार्यालय में पेड़ लगाने के अभियान की अगुवाई की। इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने इस पहल के तहत पौधे लगाए।