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राज्य का दर्जा वापस देने में हो रही देरी दुर्भाग्यपूर्ण : डॉ. फारूक
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने में हो रही लगातार देरी पर मंगलवार को गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस सांविधानिक अधिकार को लंबे समय तक टाले जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
अपने आवास पर पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात करते हुए एनसी अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि पूर्ण राज्य दर्जा की बहाली में देरी से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कम होने का खतरा है। उन्होंने पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलना कोई रियायत नहीं बल्कि एक मौलिक अधिकार है। इसे रोके रखने से लोगों की आकांक्षाएं लगातार अधूरी रह गई हैं।
पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की देरी से लोगों में असंतोष की भावना बढ़ती है। यह एक विश्वसनीय तथा जवाबदेह शासन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। उनकी चिंताओं को जोर-शोर से उठाएं और गरिमा, लोकतांत्रिक अधिकारों व राजनीतिक सशक्तीकरण के महत्व को उजागर करें।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अडिग रुख को दोहराते हुए डॉ. फारूक ने पार्टी की उस शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक वकालत के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया जिसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर के लोगों के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करना और राजनीतिक प्रक्रिया में उनके विश्वास को बहाल करना है।
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श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने में हो रही लगातार देरी पर मंगलवार को गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस सांविधानिक अधिकार को लंबे समय तक टाले जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
अपने आवास पर पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात करते हुए एनसी अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि पूर्ण राज्य दर्जा की बहाली में देरी से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कम होने का खतरा है। उन्होंने पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलना कोई रियायत नहीं बल्कि एक मौलिक अधिकार है। इसे रोके रखने से लोगों की आकांक्षाएं लगातार अधूरी रह गई हैं।
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पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की देरी से लोगों में असंतोष की भावना बढ़ती है। यह एक विश्वसनीय तथा जवाबदेह शासन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। उनकी चिंताओं को जोर-शोर से उठाएं और गरिमा, लोकतांत्रिक अधिकारों व राजनीतिक सशक्तीकरण के महत्व को उजागर करें।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अडिग रुख को दोहराते हुए डॉ. फारूक ने पार्टी की उस शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक वकालत के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया जिसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर के लोगों के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करना और राजनीतिक प्रक्रिया में उनके विश्वास को बहाल करना है।