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Srinagar News: हाईकोर्ट ने कश्मीरी गायक की एफआईआर रद्द करने की याचिका की खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने कश्मीरी गायक गुलजार अहमद गनी और अन्य की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में पिछले साल यहां के राम मुंशी बाग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।
एफआईआर एक शिकायत के बाद दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गनी और अन्य लोगों ने श्रीनगर के शिवपोरा स्थित रोज एन्क्लेव में शिकायतकर्ता के घर के पास पार्किंग को लेकर हुए विवाद पर उनके साथ हाथापाई, गाली-गलौज की और उन पर हमला करने की कोशिश की।
जस्टिस मोक्षा खजूरिया काजमी की बेंच ने टिप्पणी की कि बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करके केस की कार्यवाही रद्द करने के लिए कोई असाधारण परिस्थितियां मौजूद नहीं थीं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कोई भी व्यक्ति चाहे उसका ओहदा या प्रभाव कितना भी हो, कानून से ऊपर नहीं है।
हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह तुरंत सक्षम कोर्ट के सामने चालान पेश करे। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना इस मामले को आगे बढ़ाए। कोर्ट ने कहा कि अगर इस केस में चालान पेश करने की अनुमति और समय तक नहीं दी जाती है तो यह निश्चित रूप से न्याय का मजाक होगा क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने इस तरह का रास्ता अपनाकर पहले ही बहुत समय बेवजह बर्बाद कर दिया है।
कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह हमेशा कानून के अनुसार ही केसों को आगे बढ़ाए और उनसे निपटे। अपनी याचिका में गनी ने कहा कि जिस आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई है वह पूरी तरह से बेबुनियाद है। इसका मकसद उन्हें परेशान करना, अपमानित करना और झूठे केस में फंसाना है। शिकायत में लगाए गए आरोप मनगढ़ंत हैं बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं । गनी ने कहा कि वह और अन्य आरोपी व्यक्ति समाज के सम्मानित नागरिक हैं। उन्होंने ऐसा कोई भी काम नहीं किया है जिसके लिए उनके खिलाफ कोई आपराधिक कानूनी कार्रवाई की जरूरत हो।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने कश्मीरी गायक गुलजार अहमद गनी और अन्य की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में पिछले साल यहां के राम मुंशी बाग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।
एफआईआर एक शिकायत के बाद दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गनी और अन्य लोगों ने श्रीनगर के शिवपोरा स्थित रोज एन्क्लेव में शिकायतकर्ता के घर के पास पार्किंग को लेकर हुए विवाद पर उनके साथ हाथापाई, गाली-गलौज की और उन पर हमला करने की कोशिश की।
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जस्टिस मोक्षा खजूरिया काजमी की बेंच ने टिप्पणी की कि बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करके केस की कार्यवाही रद्द करने के लिए कोई असाधारण परिस्थितियां मौजूद नहीं थीं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कोई भी व्यक्ति चाहे उसका ओहदा या प्रभाव कितना भी हो, कानून से ऊपर नहीं है।
हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह तुरंत सक्षम कोर्ट के सामने चालान पेश करे। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना इस मामले को आगे बढ़ाए। कोर्ट ने कहा कि अगर इस केस में चालान पेश करने की अनुमति और समय तक नहीं दी जाती है तो यह निश्चित रूप से न्याय का मजाक होगा क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने इस तरह का रास्ता अपनाकर पहले ही बहुत समय बेवजह बर्बाद कर दिया है।
कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह हमेशा कानून के अनुसार ही केसों को आगे बढ़ाए और उनसे निपटे। अपनी याचिका में गनी ने कहा कि जिस आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई है वह पूरी तरह से बेबुनियाद है। इसका मकसद उन्हें परेशान करना, अपमानित करना और झूठे केस में फंसाना है। शिकायत में लगाए गए आरोप मनगढ़ंत हैं बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं । गनी ने कहा कि वह और अन्य आरोपी व्यक्ति समाज के सम्मानित नागरिक हैं। उन्होंने ऐसा कोई भी काम नहीं किया है जिसके लिए उनके खिलाफ कोई आपराधिक कानूनी कार्रवाई की जरूरत हो।