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Srinagar News: बोगदांग पीएचसी में डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान
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लेह। नुब्रा घाटी के बोगदांग गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं। इससे मरीज काफी परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की लगातार कमी का मुद्दा उठाया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पीएचसी क्षेत्र की एकमात्र सुलभ स्वास्थ्य सुविधा है। क्सर बिना डॉक्टर के संचालित होता है। मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि चिकित्सा अधिकारी अवकाश पर हैं या अन्य स्थानों पर तैनात हैं, जिससे कई लोग बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हैं।
महिलाओं के लिए स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं है। मरीजों को विशेष उपचार के लिए लगभग 280 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक यात्रा करनी पड़ती है, जो लंबी, जोखिम भरी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बोझिल साबित होती है।
सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम मोहम्मद, जो एक मानवाधिकार संगठन से जुड़े हैं, ने लद्दाख स्वास्थ्य विभाग से इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती और विशेष रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञों की रोटेशनल विजिट सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि इस दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्र में निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि बोगदांग और दिस्कित के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के कारण मरीजों की आवाजाही और भी कठिन हो गई है। स्थानीय लोगों को डर है कि आपात स्थिति में समय पर इलाज न मिलने से जान का खतरा बढ़ सकता है।
इससे पहले भी गुलाम मोहम्मद ने दिस्कित के उप-जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के समुचित संचालन और रेडियोलॉजिस्ट की कमी को लेकर चिंता जताई थी, जिससे नुब्रा घाटी में स्वास्थ्य ढांचे की खामियां उजागर होती हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय लोगों ने पीएचसी में कार्यरत कर्मचारियों की सराहना की, जो आपात स्थिति में मरीजों की मदद के लिए अपने स्तर पर दवाइयां तक उपलब्ध कराते हैं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पीएचसी क्षेत्र की एकमात्र सुलभ स्वास्थ्य सुविधा है। क्सर बिना डॉक्टर के संचालित होता है। मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि चिकित्सा अधिकारी अवकाश पर हैं या अन्य स्थानों पर तैनात हैं, जिससे कई लोग बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हैं।
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महिलाओं के लिए स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं है। मरीजों को विशेष उपचार के लिए लगभग 280 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक यात्रा करनी पड़ती है, जो लंबी, जोखिम भरी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बोझिल साबित होती है।
सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम मोहम्मद, जो एक मानवाधिकार संगठन से जुड़े हैं, ने लद्दाख स्वास्थ्य विभाग से इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती और विशेष रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञों की रोटेशनल विजिट सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि इस दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्र में निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि बोगदांग और दिस्कित के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के कारण मरीजों की आवाजाही और भी कठिन हो गई है। स्थानीय लोगों को डर है कि आपात स्थिति में समय पर इलाज न मिलने से जान का खतरा बढ़ सकता है।
इससे पहले भी गुलाम मोहम्मद ने दिस्कित के उप-जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के समुचित संचालन और रेडियोलॉजिस्ट की कमी को लेकर चिंता जताई थी, जिससे नुब्रा घाटी में स्वास्थ्य ढांचे की खामियां उजागर होती हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय लोगों ने पीएचसी में कार्यरत कर्मचारियों की सराहना की, जो आपात स्थिति में मरीजों की मदद के लिए अपने स्तर पर दवाइयां तक उपलब्ध कराते हैं।