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Srinagar News: लद्दाख में वन्यजीव संरक्षण के लिए ‘शान’ कंजर्वेशन सोसायटी को उपराज्यपाल की मंजूरी
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लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने “स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर (शान) कंजर्वेशन सोसायटी” के गठन को मंजूरी दे दी है। यह अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।
यह सोसायटी वन्यजीवों और उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए एक समर्पित संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करेगी, जिसमें विशेष ध्यान हिम तेंदुए (स्नो लेपर्ड) और उसके प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर रहेगा। सोसायटी जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, पारिस्थितिक विकास, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने तथा सतत इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेगी।
उपराज्यपाल ने हिम तेंदुए को लद्दाख की पारिस्थितिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह पहल विज्ञान आधारित और समुदाय संचालित संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देगी तथा पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेगी।
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उपराज्यपाल इस सोसायटी के अध्यक्ष होंगे। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, संरक्षणविद और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ‘शान’ कंजर्वेशन सोसायटी से लद्दाख के नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
यह सोसायटी वन्यजीवों और उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए एक समर्पित संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करेगी, जिसमें विशेष ध्यान हिम तेंदुए (स्नो लेपर्ड) और उसके प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर रहेगा। सोसायटी जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, पारिस्थितिक विकास, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने तथा सतत इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेगी।
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उपराज्यपाल ने हिम तेंदुए को लद्दाख की पारिस्थितिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह पहल विज्ञान आधारित और समुदाय संचालित संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देगी तथा पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेगी।
उपराज्यपाल इस सोसायटी के अध्यक्ष होंगे। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, संरक्षणविद और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ‘शान’ कंजर्वेशन सोसायटी से लद्दाख के नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।