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Srinagar News: नाबार्ड के सहयोग से लद्दाख के छह उत्पादों को मिला जीआई टैग
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लेह। लद्दाख की पारंपरिक हस्तकलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में नाबार्ड ने केंद्र शासित प्रदेश के छह स्वदेशी उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नव-पंजीकृत उत्पादों में लद्दाख चिलिंग मेटल वर्क, पबू ऑफ लद्दाख, लद्दाख लिकिर पॉटरी, लद्दाख छाली टेक्सटाइल्स, लद्दाख पेंटिंग और लद्दाख थिग्मा शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ नाबार्ड के सहयोग से जीआई मान्यता प्राप्त लद्दाखी उत्पादों की कुल संख्या सात हो गई है। इससे पहले वर्ष 2023 में लद्दाख वुड कार्विंग को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ था।
यह पहल नाबार्ड द्वारा समर्थित एक अनुदान आधारित परियोजना के माध्यम से लागू की गई, जिसे एजेंसी ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन ने क्रियान्वित किया। संस्था ने भौगोलिक संकेतक अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी सहायता प्रदान की।
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अधिकारियों के अनुसार जीआई टैग से लद्दाख के पारंपरिक उत्पादों को नकली और अनधिकृत उपयोग से संरक्षण मिलेगा, उनकी बाजार में पहचान और मूल्य बढ़ेगा, ब्रांडिंग के अवसर मजबूत होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में मदद मिलेगी।
नव-पंजीकृत उत्पादों में लद्दाख चिलिंग मेटल वर्क, पबू ऑफ लद्दाख, लद्दाख लिकिर पॉटरी, लद्दाख छाली टेक्सटाइल्स, लद्दाख पेंटिंग और लद्दाख थिग्मा शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ नाबार्ड के सहयोग से जीआई मान्यता प्राप्त लद्दाखी उत्पादों की कुल संख्या सात हो गई है। इससे पहले वर्ष 2023 में लद्दाख वुड कार्विंग को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ था।
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यह पहल नाबार्ड द्वारा समर्थित एक अनुदान आधारित परियोजना के माध्यम से लागू की गई, जिसे एजेंसी ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन ने क्रियान्वित किया। संस्था ने भौगोलिक संकेतक अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी सहायता प्रदान की।
अधिकारियों के अनुसार जीआई टैग से लद्दाख के पारंपरिक उत्पादों को नकली और अनधिकृत उपयोग से संरक्षण मिलेगा, उनकी बाजार में पहचान और मूल्य बढ़ेगा, ब्रांडिंग के अवसर मजबूत होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में मदद मिलेगी।