बंजर खेतों से सफल उद्यम तक: सोनम आंगमो ने लद्दाख में मशरूम खेती को बनाया व्यवसाय, कृषि को दे रही नई दिशा
लद्दाख की युवा उद्यमी सोनम आंगमो ने लिकिर गांव में मशरूम खेती शुरू कर ग्रामीण उद्यमिता और सतत खेती को नया आयाम दिया है।
विस्तार
लेह जिले के खूबसूरत लिकिर गांव में एक युवा उद्यमी कृषि की नई परिभाषा गढ़ते हुए लोगों को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मशरूम उत्पादक और लद्दाख एग्रीटेक की संस्थापक सोनम आंगमो लद्दाख में ग्रामीण उद्यमिता और सतत खेती का प्रतीक बनकर उभरी हैं।
सोनम ने अपनी यात्रा वर्ष 2018 में धारवाड़ कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय कर्नाटक से मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद शुरू की। उस समय वह एक दुविधा में थीं, क्या पीएचडी करें या पारंपरिक नौकरी अपनाएं। हालांकि, अपने गांव में परिवार के साथ बिताया गया एक महीने का छोटा सा समय उनके लिए निर्णायक साबित हुआ।
इस दौरान उन्होंने देखा कि गांव के अधिकांश कृषि क्षेत्र लंबे समय से बिना खेती के पड़े हैं। पर्यटन के प्रभाव और त्वरित आय की तलाश में कई युवा शहरों की ओर पलायन कर चुके थे, जिससे गांव में मुख्यतः बुजुर्ग ही रह गए थे। बंजर पड़े खेतों का दृश्य सोनम को गहराई से प्रभावित कर गया और उन्होंने अपने कृषि संबंधी ज्ञान को अपने ही समुदाय के हित में उपयोग करने का संकल्प लिया।
कुछ सार्थक करने के दृढ़ निश्चय के साथ सोनम ने नौकरी के बजाय उद्यमिता का रास्ता चुना और लद्दाख एग्रीटेक नाम से मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित की। आज इस उद्यम का वार्षिक टर्नओवर लगभग 15 लाख रुपये है।
लद्दाख की कड़ाके की सर्दियों के कारण फिलहाल मशरूम की खेती केवल गर्मियों के मौसम में ही संभव है। इन सीमाओं के बावजूद सोनम ने अपने काम को लगातार विस्तार दिया है। वर्तमान में उनके साथ दो स्थायी कर्मचारी काम करते हैं, जबकि आवश्यकता के अनुसार अस्थायी कर्मचारियों को भी रखा जाता है।
शुरुआती दौर में अपने परिवार, खासकर माता-पिता को मनाना सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय लद्दाख में नौकरी के अवसर उपलब्ध थे और उद्यमिता को जोखिम भरा माना जाता था। फिर भी सोनम अपने गांव में ही आजीविका बनाने के अपने संकल्प पर अडिग रहीं।
आने वाले समय को लेकर वह काफी महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रही हैं। पिछले वर्ष उत्पादन बाजार की मांग के अनुरूप नहीं हो पाया था, इसलिए इस वर्ष वह उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करना चाहती हैं। इसके लिए वह दो और कर्मचारियों की नियुक्ति करने की योजना बना रही हैं।
सोनम टिकाऊ खेती के विकल्पों पर भी काम कर रही हैं। मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले भूसे से वह पहले छोटे स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट तैयार करती थीं, लेकिन इस वर्ष वह इसे बड़े पैमाने पर शुरू करने की योजना बना रही हैं ताकि यह एक अतिरिक्त आय का स्रोत बन सके।
उनकी पहल केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष उन्होंने डिग्री कॉलेज के छात्रों को प्रशिक्षण दिया और मशरूम खेती से जुड़े कार्यशालाओं के लिए कई लोगों के फोन भी आए। इसी के चलते इस वर्ष वह एक दिवसीय हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित करने की योजना बना रही हैं, जिससे इच्छुक लोग खेती की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से सीख सकें।
मशरूम स्पॉन उत्पादन भी उनका एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है। वर्ष 2025 में सोनम ने जांस्कार और नुब्रा घाटियों के गांवों में लगभग 10 किलोग्राम मशरूम स्पॉन की आपूर्ति की थी। इस वर्ष उन्हें पहले से ही अधिक मात्रा के ऑर्डर मिल चुके हैं, इसलिए वह स्पॉन उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि खेती निरंतर जारी रह सके।
नवाचार, दृढ़ता और अपनी जड़ों से गहरे जुड़ाव के साथ सोनम आंगमो न केवल एक सफल उद्यम खड़ा कर रही हैं, बल्कि लद्दाख के दूरदराज गांवों में कृषि के पुनर्जीवन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।