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Srinagar News: पूर्व तहसीलदार रिश्वत लेने का दोषी करार, एक साल की कैद
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। श्रीनगर की विशेष एंटी करप्शन अदालत ने सोमवार को 15 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में एक पूर्व तहसीलदार को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषी मोहम्मद अकरम खान को एक साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 2010 में चडूरा के एक निवासी की शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप था कि आरोपी ने लंबित संपत्ति विवाद को उसके पक्ष में तय करने के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। एसीबी ने ट्रैप लगाकर आरोपी को उनके आवास जवाहर नगर श्रीनगर में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ था। शिकायतकर्ता और एक स्वतंत्र गवाह की ओर से ट्रैप लगाने वाली टीम को संकेत देने के बाद उनके कमरे में तकिया के नीचे से रिश्वत के पैसे बरामद किए गए। अदालत ने मुकदमे के बाद आरोपी को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में अवैध लाभ स्वीकार करने का दोषी पाया।
सजा सुनाते हुए अदालत ने सहायक कारणों पर ध्यान दिया जिनमें दोषी की उच्च आयु, सेवा से सेवानिवृत्ति, शुद्ध पूर्व इतिहास और 15 वर्षों से अधिक चल रहे लंबित मुकदमे को शामिल किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी पेश नहीं किया जिससे यह पता चल सके कि उसके पास रिश्वत लेने या रिश्वत लेने का कोई ट्रैक रिकॉर्ड है या वह इस मामले से पहले या घटना से पहले या उसके बाद किसी भी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर चुका है।
अदालत ने दोषी को एक साल के साधारण कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अगर पहले से किसी भी समय वह हिरासत में रह चुका है तो उसे सजा से घटा दिया जाए।
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श्रीनगर। श्रीनगर की विशेष एंटी करप्शन अदालत ने सोमवार को 15 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में एक पूर्व तहसीलदार को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषी मोहम्मद अकरम खान को एक साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 2010 में चडूरा के एक निवासी की शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप था कि आरोपी ने लंबित संपत्ति विवाद को उसके पक्ष में तय करने के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। एसीबी ने ट्रैप लगाकर आरोपी को उनके आवास जवाहर नगर श्रीनगर में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ था। शिकायतकर्ता और एक स्वतंत्र गवाह की ओर से ट्रैप लगाने वाली टीम को संकेत देने के बाद उनके कमरे में तकिया के नीचे से रिश्वत के पैसे बरामद किए गए। अदालत ने मुकदमे के बाद आरोपी को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में अवैध लाभ स्वीकार करने का दोषी पाया।
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सजा सुनाते हुए अदालत ने सहायक कारणों पर ध्यान दिया जिनमें दोषी की उच्च आयु, सेवा से सेवानिवृत्ति, शुद्ध पूर्व इतिहास और 15 वर्षों से अधिक चल रहे लंबित मुकदमे को शामिल किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी पेश नहीं किया जिससे यह पता चल सके कि उसके पास रिश्वत लेने या रिश्वत लेने का कोई ट्रैक रिकॉर्ड है या वह इस मामले से पहले या घटना से पहले या उसके बाद किसी भी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर चुका है।
अदालत ने दोषी को एक साल के साधारण कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अगर पहले से किसी भी समय वह हिरासत में रह चुका है तो उसे सजा से घटा दिया जाए।