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Srinagar News: शोपियां के केलर में सरकारी डिग्री कॉलेज की मांग ने जोर पकड़ा
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- लोग बोले, उच्च शिक्षा पाने के लिए छात्रों को लंबे समय से मुश्किलों का करना पड़ रहा सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। दक्षिण कश्मीर की केलर तहसील के निवासियों ने इलाके में एक सरकारी डिग्री कॉलेज खोलने की अपनी मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा पाने में छात्रों को लंबे समय से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
केलर एक दूरदराज और पहाड़ी तहसील है जिसमें 27 से ज्यादा गांव आते हैं। यहां की ज्यादातर आबादी आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आती है। इस इलाके में रोजी-रोटी के मुख्य साधन पशुपालन, खेती-बाड़ी और बागवानी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डिग्री कॉलेज न होने की वजह से छात्रों को साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के कोर्स करने के लिए शोपियां और पुलवामा तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रोजाना आना-जाना छात्रों और उनके परिवारों दोनों पर ही भारी बोझ डालता है।
सामाजिक कार्यकर्ता दिलबर मंजूर ने कहा, छात्रों को आने-जाने के सही साधन न होने से टैक्सी पर निर्भर रहना पड़ता है जो असुविधाजनक होने के साथ-साथ महंगा भी पड़ता है। मौसम खराब होने पर सफर मुश्किल और असुरक्षित हो जाता है। इसका असर छात्रों की पढ़ाई-लिखाई पर पड़ता है। स्थानीय निवासी बिलाल अहमद गनई ने कहा कि रोजाना आने-जाने का औसत खर्च 200 से 250 रुपये है जो कई परिवारों के लिए उठा पाना मुश्किल होता है। इस कारण कई छात्र अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं।
केलर में फिलहाल दो हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल केलर जिसमें करीब 350 छात्र पढ़ते हैं। दूसरा सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल नारापोरा जिसमें 9वीं से 12वीं कक्षा तक के लगभग 300 छात्र पढ़ते हैं। इसके बावजूद प्रदेश विधानसभा में स्थानीय विधायक की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में कथित तौर पर यह कहा गया कि इलाके में डिग्री कॉलेज न खोलने की वजह छात्रों की कम संख्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बात जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। दक्षिण कश्मीर की केलर तहसील के निवासियों ने इलाके में एक सरकारी डिग्री कॉलेज खोलने की अपनी मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा पाने में छात्रों को लंबे समय से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
केलर एक दूरदराज और पहाड़ी तहसील है जिसमें 27 से ज्यादा गांव आते हैं। यहां की ज्यादातर आबादी आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आती है। इस इलाके में रोजी-रोटी के मुख्य साधन पशुपालन, खेती-बाड़ी और बागवानी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डिग्री कॉलेज न होने की वजह से छात्रों को साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के कोर्स करने के लिए शोपियां और पुलवामा तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रोजाना आना-जाना छात्रों और उनके परिवारों दोनों पर ही भारी बोझ डालता है।
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सामाजिक कार्यकर्ता दिलबर मंजूर ने कहा, छात्रों को आने-जाने के सही साधन न होने से टैक्सी पर निर्भर रहना पड़ता है जो असुविधाजनक होने के साथ-साथ महंगा भी पड़ता है। मौसम खराब होने पर सफर मुश्किल और असुरक्षित हो जाता है। इसका असर छात्रों की पढ़ाई-लिखाई पर पड़ता है। स्थानीय निवासी बिलाल अहमद गनई ने कहा कि रोजाना आने-जाने का औसत खर्च 200 से 250 रुपये है जो कई परिवारों के लिए उठा पाना मुश्किल होता है। इस कारण कई छात्र अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं।
केलर में फिलहाल दो हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल केलर जिसमें करीब 350 छात्र पढ़ते हैं। दूसरा सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल नारापोरा जिसमें 9वीं से 12वीं कक्षा तक के लगभग 300 छात्र पढ़ते हैं। इसके बावजूद प्रदेश विधानसभा में स्थानीय विधायक की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में कथित तौर पर यह कहा गया कि इलाके में डिग्री कॉलेज न खोलने की वजह छात्रों की कम संख्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बात जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।