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कुवैत हादसे में जान गंवाने वाले छह युवाओं के शव लाए जाएं : जेकेएसए
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (जेकेएसए) ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर कुवैत में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले जम्मू और कश्मीर के छह युवाओं के शवों को वापस लाने के लिए तत्काल दखल देने की मांग की है।
विदेश मंत्री को संबोधित एक पत्र में संघ ने पुंछ और राजोरी जिलों के उन युवाओं की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया जो 9 अप्रैल को कुवैत के साद अल अब्दुल्ला इलाके के पास एक दुखद सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि हादसे में मृत फरीद अहमद, सरफराज अहमद, मोहम्मद खालिक, मुख्तार अहमद, मुमताज राशिद और तस्वीर हुसैन काम से लौट रहे थे। तभी एक व्यस्त हाईवे पर उनकी गाड़ी की टक्कर दूसरी गाड़ी से हो गई और उसके बाद उसमें आग लग गई। इनमें से ज्यादातर लोग बाहर नहीं निकल पाए और मौके पर ही जलकर मर गए। सभी मृतक जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजोरी जिलों के रहने वाले थे और आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से आते थे। वे रोजगार के लिए कुवैत गए थे। ब्यूरो
और अपने परिवारों के लिए कमाने वाले एकमात्र सदस्य थे। उनकी असमय मृत्यु ने उनके परिवारों और पूरे समुदाय को गहरे सदमे और शोक में डाल दिया है।
शोक संतप्त परिवार मृतकों का अंतिम संस्कार अपनी मातृभूमि में ही करना चाहते हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय से इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
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विदेश मंत्री को संबोधित एक पत्र में संघ ने पुंछ और राजोरी जिलों के उन युवाओं की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया जो 9 अप्रैल को कुवैत के साद अल अब्दुल्ला इलाके के पास एक दुखद सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि हादसे में मृत फरीद अहमद, सरफराज अहमद, मोहम्मद खालिक, मुख्तार अहमद, मुमताज राशिद और तस्वीर हुसैन काम से लौट रहे थे। तभी एक व्यस्त हाईवे पर उनकी गाड़ी की टक्कर दूसरी गाड़ी से हो गई और उसके बाद उसमें आग लग गई। इनमें से ज्यादातर लोग बाहर नहीं निकल पाए और मौके पर ही जलकर मर गए। सभी मृतक जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजोरी जिलों के रहने वाले थे और आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से आते थे। वे रोजगार के लिए कुवैत गए थे। ब्यूरो
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और अपने परिवारों के लिए कमाने वाले एकमात्र सदस्य थे। उनकी असमय मृत्यु ने उनके परिवारों और पूरे समुदाय को गहरे सदमे और शोक में डाल दिया है।
शोक संतप्त परिवार मृतकों का अंतिम संस्कार अपनी मातृभूमि में ही करना चाहते हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय से इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।