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Srinagar News: पश्चिमी विक्षोभ से मार्च में खूब बरसे बादल, बारिश फिर भी 34% कम
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- केंद्र शासित प्रदेश में सामान्य 152.9 मिमी के मुकाबले 100.7 मिमी बारिश हुई
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर में मार्च 2026 काफी सूखा रहा। इस महीने के दौरान कई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ आने के बावजूद कुल मिलाकर बारिश में 34% की कमी दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में सामान्य 152.9 मिमी के मुकाबले 100.7 मिमी बारिश हुई जिससे यह महीना कमी वाली श्रेणी में आ गया। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सामान्य 115.0 मिमी के मुकाबले 88.5 मिमी बारिश दर्ज की गई जो 23% की कमी दर्शाती है। वहीं, शीतकालीन राजधानी जम्मू में 92.3 मिमी के मुकाबले 52.4 मिमी बारिश हुई जो 43% कम है।
कश्मीर घाटी के कई जिलों में बारिश में काफी कमी देखी गई। अनंतनाग (-47%), बडगाम (-44%), बांदीपोरा (-35%), पुलवामा (-25%) और कुपवाड़ा (-20%) में बारिश सामान्य स्तर से कम रही। कुलगाम (-61%) और शोपियां (-74%) में स्थिति ज्यादा चिंताजनक थी। यहां साल के इस समय के हिसाब से बारिश उम्मीद से बहुत कम हुई।
जम्मू संभाग में भी कठुआ (-62%), उधमपुर (-51%), डोडा (-52%), रामबन (-38%), किश्तवाड़ (-37%) और रियासी (-36%) में बारिश में काफी कमी दर्ज की गई। हालांकि सभी जिलों में एक जैसा रुझान नहीं रहा। पुंछ सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला बनकर उभरा जहां 207.3 मिमी बारिश दर्ज की गई जो सामान्य से 26% ज्यादा है, वहीं सांबा में भी सामान्य से ज्यादा बारिश (+39%) हुई। कुछ जिले जैसे बारामुला (-13%), राजोरी (-7%) और गांदरबल (+10%) में बारिश लगभग सामान्य स्तर पर ही रही।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की बारंबारता का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उनसे प्रभावी वर्षा भी हो। इनमें से कई सिस्टम या तो तेजी से आगे बढ़ रहे थे या उनमें नमी की कमी थी, अथवा वे स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों के साथ ठीक से तालमेल नहीं बिठा पाए। इसके चलते उनकी वर्षा करने की क्षमता सीमित रह गई। जैसे-जैसे यह क्षेत्र अप्रैल माह में प्रवेश कर रहा है, मार्च में हुई वर्षा की कमी का असर मिट्टी की नमी, कृषि और जल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां वर्षा में भारी कमी देखी गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर में मार्च 2026 काफी सूखा रहा। इस महीने के दौरान कई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ आने के बावजूद कुल मिलाकर बारिश में 34% की कमी दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में सामान्य 152.9 मिमी के मुकाबले 100.7 मिमी बारिश हुई जिससे यह महीना कमी वाली श्रेणी में आ गया। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सामान्य 115.0 मिमी के मुकाबले 88.5 मिमी बारिश दर्ज की गई जो 23% की कमी दर्शाती है। वहीं, शीतकालीन राजधानी जम्मू में 92.3 मिमी के मुकाबले 52.4 मिमी बारिश हुई जो 43% कम है।
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कश्मीर घाटी के कई जिलों में बारिश में काफी कमी देखी गई। अनंतनाग (-47%), बडगाम (-44%), बांदीपोरा (-35%), पुलवामा (-25%) और कुपवाड़ा (-20%) में बारिश सामान्य स्तर से कम रही। कुलगाम (-61%) और शोपियां (-74%) में स्थिति ज्यादा चिंताजनक थी। यहां साल के इस समय के हिसाब से बारिश उम्मीद से बहुत कम हुई।
जम्मू संभाग में भी कठुआ (-62%), उधमपुर (-51%), डोडा (-52%), रामबन (-38%), किश्तवाड़ (-37%) और रियासी (-36%) में बारिश में काफी कमी दर्ज की गई। हालांकि सभी जिलों में एक जैसा रुझान नहीं रहा। पुंछ सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला बनकर उभरा जहां 207.3 मिमी बारिश दर्ज की गई जो सामान्य से 26% ज्यादा है, वहीं सांबा में भी सामान्य से ज्यादा बारिश (+39%) हुई। कुछ जिले जैसे बारामुला (-13%), राजोरी (-7%) और गांदरबल (+10%) में बारिश लगभग सामान्य स्तर पर ही रही।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की बारंबारता का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उनसे प्रभावी वर्षा भी हो। इनमें से कई सिस्टम या तो तेजी से आगे बढ़ रहे थे या उनमें नमी की कमी थी, अथवा वे स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों के साथ ठीक से तालमेल नहीं बिठा पाए। इसके चलते उनकी वर्षा करने की क्षमता सीमित रह गई। जैसे-जैसे यह क्षेत्र अप्रैल माह में प्रवेश कर रहा है, मार्च में हुई वर्षा की कमी का असर मिट्टी की नमी, कृषि और जल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां वर्षा में भारी कमी देखी गई है।