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Srinagar News: कश्मीर के कृषि उत्पादों के लिए भविष्य की राह तैयार कर रहा स्कॉस्ट
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स्कॉस्ट का जीपीएस फील्ड लोकटर। अमर उजाला
- फोटो : प्रमाण पत्र और ट्रॉफी के साथ मुस्कान।
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- किसान मेले में दिखी थी झलक, नई तकनीक को किसानों से किया जा रहा साझा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (स्कॉस्ट) घाटी में कृषि उत्पादों के लिए भविष्य की राह तैयार कर रहा है। इसकी झलक स्कॉस्ट में लगे कृषि मेले में भी देखने को मिली थी। एआई ऑपरेटेड मशीनें हों या जीपीएस मैपिंग करने वाले ड्रोन, उन्नत बीज से हाइब्रिड पशु नस्लें... सबकुछ अब किसानों के साथ साझा किया जा रहा है।
स्कॉस्ट-कश्मीर के वाइस चांसलर प्रोफेसर नजीर अहमद ने बताया कि संस्थान किसानों के काम आने वाली तकनीकों पर लगातार काम रहा है। वैश्विक स्तर की चुनौतियां का मुकाबला करने के लिए जम्मू और कश्मीर को खेती के उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादों को बढ़ाना होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए तकनीक आधारित और ऑर्गेनिक खेती जरूरी हैं।
स्कॉस्ट कश्मीर हर साल किसानों को नई तकनीक और उन्नत नस्लों की जानकारी देने के अलावा बेहतर बीज भी उपलब्ध कराता है। हमारा पूरा ध्यान इस बात पर है कि खेती में कम से कम लागत और मेहनत पर अधिक से अधिक लाभ लिया जा सके, तभी बाजार के मुकाबले में ठहर पाएंगे। अपने उत्पाद को विश्वस्तरीय और कम कीमत का बनाना होगा। इसके लिए तकनीक का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना होगा। पूरी खेती वैज्ञानिक ढंग से हो, साथ ही पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।
स्टॉलों पर दिखा था तकनीक और नवाचार
स्कॉस्ट कश्मीर के शालीमार कैंपस में 14 से 16 फरवरी तक कृषि मेले गोंगुल का आयोजन किया गया था। इसमें स्कॉस्ट के नवाचार और तकनीकों के प्रदर्शन के लिए कई स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉल में हाइब्रिड बीजों, पशुओं की उन्नत नस्लों, एआई आधारित ड्रिप तकनीक, जीपीएस गाइडेड ड्रोन के अलावा खेती के पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर का खाका प्रस्तुत किया गया था। मक्की, धान और मशरूम की किस्मों का प्रदर्शन किया गया। फ्लाेरीकल्चर विभाग ने हर मौसम में खिलने वाले गुलदाउदी का भी स्टॉल लगाया था।
गांव-गांव जाकर दे रहे हैं जानकारी
स्कॉस्ट के अधिकारियों ने बताया कि स्कॉस्ट के प्रयास इस क्षेत्र में खेती के भविष्य को आकार दे रहे हैं। आधुनिकता और आर्थिक विकास के उद्देश्य से अलग-अलग सरकारी कार्यक्रम के तहत नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। अब इस तकनीक को दूर दराज के गांवों में भी शिविर लगाकर साझा किया जा रहा है। संस्थान हर साल किसानों को नई तकनीक और उन्नत नस्लों की जानकारी देने के अलावा बेहतर बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (स्कॉस्ट) घाटी में कृषि उत्पादों के लिए भविष्य की राह तैयार कर रहा है। इसकी झलक स्कॉस्ट में लगे कृषि मेले में भी देखने को मिली थी। एआई ऑपरेटेड मशीनें हों या जीपीएस मैपिंग करने वाले ड्रोन, उन्नत बीज से हाइब्रिड पशु नस्लें... सबकुछ अब किसानों के साथ साझा किया जा रहा है।
स्कॉस्ट-कश्मीर के वाइस चांसलर प्रोफेसर नजीर अहमद ने बताया कि संस्थान किसानों के काम आने वाली तकनीकों पर लगातार काम रहा है। वैश्विक स्तर की चुनौतियां का मुकाबला करने के लिए जम्मू और कश्मीर को खेती के उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादों को बढ़ाना होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए तकनीक आधारित और ऑर्गेनिक खेती जरूरी हैं।
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स्कॉस्ट कश्मीर हर साल किसानों को नई तकनीक और उन्नत नस्लों की जानकारी देने के अलावा बेहतर बीज भी उपलब्ध कराता है। हमारा पूरा ध्यान इस बात पर है कि खेती में कम से कम लागत और मेहनत पर अधिक से अधिक लाभ लिया जा सके, तभी बाजार के मुकाबले में ठहर पाएंगे। अपने उत्पाद को विश्वस्तरीय और कम कीमत का बनाना होगा। इसके लिए तकनीक का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना होगा। पूरी खेती वैज्ञानिक ढंग से हो, साथ ही पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।
स्टॉलों पर दिखा था तकनीक और नवाचार
स्कॉस्ट कश्मीर के शालीमार कैंपस में 14 से 16 फरवरी तक कृषि मेले गोंगुल का आयोजन किया गया था। इसमें स्कॉस्ट के नवाचार और तकनीकों के प्रदर्शन के लिए कई स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉल में हाइब्रिड बीजों, पशुओं की उन्नत नस्लों, एआई आधारित ड्रिप तकनीक, जीपीएस गाइडेड ड्रोन के अलावा खेती के पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर का खाका प्रस्तुत किया गया था। मक्की, धान और मशरूम की किस्मों का प्रदर्शन किया गया। फ्लाेरीकल्चर विभाग ने हर मौसम में खिलने वाले गुलदाउदी का भी स्टॉल लगाया था।
गांव-गांव जाकर दे रहे हैं जानकारी
स्कॉस्ट के अधिकारियों ने बताया कि स्कॉस्ट के प्रयास इस क्षेत्र में खेती के भविष्य को आकार दे रहे हैं। आधुनिकता और आर्थिक विकास के उद्देश्य से अलग-अलग सरकारी कार्यक्रम के तहत नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। अब इस तकनीक को दूर दराज के गांवों में भी शिविर लगाकर साझा किया जा रहा है। संस्थान हर साल किसानों को नई तकनीक और उन्नत नस्लों की जानकारी देने के अलावा बेहतर बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है।