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Jammu: सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की आतंकी साजिश नाकाम, 14 किलो IED बरामद; तलाशी अभियन में तेजी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 09 Apr 2026 01:38 AM IST
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सार

जैनापोरा-चित्रागाम सड़क पर 14.3 किलोग्राम की आईईडी सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने के लिए लगाई गई थी।

Srinagar: Terror plot to target security forces foiled; 14 kg IED recovered.
demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में बुधवार को सेना ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बरामद कर आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया। जैनापोरा-चित्रागाम सड़क पर 14.3 किलोग्राम की आईईडी सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने के लिए लगाई गई थी।

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सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के जवानों ने बुधवार तड़के तलाशी अभियान के दाैरान आईईडी बरामद की। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि तुरंत यातायात रोककर बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) को मौके पर बुलाया गया। बिना किसी नुकसान के विस्फोटक को सुरक्षित स्थान पर नियंत्रित विस्फोट से निष्क्रिय कर दिया गया।
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शुरुआती जांच में पता चला है कि आईईडी लगाने का मकसद सुरक्षाबलों के वाहनों और पेट्रोलिंग पार्टियों को निशाना बनाना था जिससे इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला हो सकता था। इस घटना के बाद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ सहित संयुक्त बलों ने आतंकियों की तलाश में अभियान तेज कर दिया है। सुरक्षाबलों की समय पर कार्रवाई ने आतंकियों के जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने के बड़े प्रयास को नाकाम कर दिया है।

उपराज्ययपाल ने आतंकियों के मददगार दो और सरकारी कर्मियों को किया बर्खास्त
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत दो और सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में फरहत अली खांडे और शफी डार शामिल हैं। रामबन निवासी फरहत शिक्षा विभाग में तो बांदीपोरा का शफी ग्रामीण विकास विभाग में तैनात था। दोनों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे।

अधिकारियों के अनुसार जांच में आतंकियों से संबंध के आरोपों की पुष्टि के बाद यह कार्रवाई की गई है। फरहत हिजुबल मुजाहिदीन के लिए काम करता था। वह हिजबुल के लिए धन जुटाता था। वह स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश कर आतंक की राह पर चलने के लिए भी उकसाता था। फरहत रामबन और आसपास के इलाकों में आतंकी नेटवर्क को फिर से खड़ा करने में लगा हुआ था।

अधिकारियों के अनुसार शफी डार लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों का मददगार था। पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर वह आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराता था। शफी को उसके पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी। अधिकारियों के अनुसार फरहत और शफी सरकारी तंत्र में बैठकर आतंकियों व अलगाववादियों की विचारधारा को फैलाने का काम करते थे। इस कार्रवाई को उपराज्यपाल प्रशासन ने सफेदपोश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति बताया है। यह भी कहा गया है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इन दोनों के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही थीं।

अब तक 90 कर्मचारियों को उपराज्यपाल कर चुके बर्खास्त
उपराज्यपाल प्रशासन ने पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों के मददगार सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की है। बर्खास्त करने के साथ-साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है। इस कार्रवाई के साथ ही पिछले पांच वर्षों में आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों में शामिल 90 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किए जा चुके हैं।

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