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Kashmir: स्ट्राबेरी हुई लाल, चेरी जून-जुलाई में बदलेगी रंग, कश्मीर की चेरी की देश-विदेश में भारी डिमांड

अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 27 Apr 2026 01:42 PM IST
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सार

प्रदेश में चेरी का उत्पादन 13 से 15 हजार मीट्रिक टन के बीच है, जिसमें अधिकांश हिस्सा कश्मीर से आता है और देश-विदेश में इसकी अच्छी मांग रहती है।

Strawberries in the state have ripened and are ready for harvesting.
स्ट्राबेरी की खेती। - फोटो : एआई।
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विस्तार

प्रदेश में स्ट्राबेरी पककर तुड़ान के लिए तैयार है। चेरी भी जून-जुलाई में बिक्री के लिए तैयार हो जाएगी। प्रदेश और देशभर के अलावा विदेश में भी इन फलाें की डिमांड यहां से पूरी होती है। जम्मू-कश्मीर में चेरी की 13 से 15 हजार मीट्रिक टन (एमटी) के आसपास पैदावार हर साल हो रही है। इसमें 10 हजार एमटी फल देश और विदेश में भेजा जाता है। तीन हजार एमटी तक प्रदेश में आपूर्ति होती है। 90 फीसदी चेरी का उत्पादन कश्मीर घाटी में होता है।

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हालांकि चेरी का उत्पादन साल दर साल घटता-बढ़ता रहा है। वर्ष 2023 में 13, 2024 में 12 और 2025 में 14 हजार मीट्रिक टन तक पैदावार रही है। कारण है कि चेरी का उत्पादन प्रतिकूल मौसम, अनियमित बारिश और जलवायु परिवर्तन के कारण गिर रहा है। इससे बागवानों को हर साल नुकसान हो रहा है। इस व्यवसाय से 20 हजार से ज्यादा बागवान जुड़े हैं। बागवानी विभाग की ओर से इसका तुड़ान जून-जुलाई के मध्य में शुरू किया जाता है। चेरी बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है।

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प्रदेश में दो हजार हेक्टेयर में स्ट्राबेरीकी खेती, 10 टन तक मिलती पैदावार
जम्मू संभाग के पहाड़ी इलाके में स्ट्राबेरी की पैदावार ज्यादा होती है। दो हजार हेक्टेयर में खेती की जा रही है। स्ट्राबेरी बाजार में 170 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। इस व्यवसाय से करीब सात हजार किसान जुड़े हैं। स्ट्रॉबेरी पकने के बाद अब मई के पहले सप्ताह से इसका तुड़ान शुरू होगा।

स्ट्राबेरी का मई से तुड़ान शुरू हो जाएगा। चेरी जून और जुलाई के मध्य तक पकेगी। बागवान स्ट्राबेरी के तुड़ान की तैयारी में जुट गए हैं।- प्रशांत बख्शी, एचओडी, बागवानी विभाग, स्काॅस्ट जम्मू

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