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Srinagar: हाईकोर्ट ने 2012 में पारित एक सरकारी आदेश को सही ठहराया, अदालत ने खारिज की याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 28 Apr 2026 12:40 AM IST
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सार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने 2012 में पारित एक सरकारी आदेश को सही ठहराया है। इसके तहत पूर्ववर्ती सरकारी परिवहन उपक्रम (जीटीयू) के कर्मचारियों की उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें उन्होंने एसआरओ 14 (1996) और एसआरओ 225 (1997) के तहत उपलब्ध लाभों को अपने लिए भी लागू करने की मांग की थी।
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने 2012 में पारित एक सरकारी आदेश को सही ठहराया है। इसके तहत पूर्ववर्ती सरकारी परिवहन उपक्रम (जीटीयू) के कर्मचारियों की उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें उन्होंने एसआरओ 14 (1996) और एसआरओ 225 (1997) के तहत उपलब्ध लाभों को अपने लिए भी लागू करने की मांग की थी।
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अपने फैसले में जस्टिस संजय धर की पीठ ने यह माना कि पूर्ववर्ती जीटीयू के वे कर्मचारी जिन्होंने जम्मू-कश्मीर राज्य सड़क परिवहन निगम (एसआटीसी) में सेवा देने का विकल्प चुना था, वे सरकारी कर्मचारियों पर लागू होने वाले लाभों का दावा तब तक नहीं कर सकते जब तक कि निगम द्वारा उन नियमों को औपचारिक रूप से अपनाया न गया हो।
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याचिकाकर्ताओं ने सरकार के 2012 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें एसआरओ के तहत इन-सीटू (पद पर रहते हुए) पदोन्नति और संबंधित लाभों के उनके दावे को खारिज कर दिया गया था। साथ ही उन्होंने मार्च 2002 से बकाया वेतन जारी करने की भी मांग की थी।
शाह मोहम्मद बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य मामले में डिवीजन बेंच के फैसले सहित पिछली रूलिंग्स पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने दोहराया कि जिन कर्मचारियों ने निगम की सेवा का विकल्प चुना था वे अब सरकारी कर्मचारी नहीं रह गए हैं, सिवाय सीमित पेंशन संबंधी लाभों के। ऐसे में उन पर निगम के सेवा नियम लागू होते हैं न कि वे नियम जो सरकारी कर्मचारियों पर लागू होते हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से महंगाई भत्ते के संबंध में उद्धृत पिछली डिवीजन बेंच के फैसले को अलग बताते हुए अदालत ने कहा कि उस मामले ने निगम और सरकारी कर्मचारियों के बीच सभी सेवा शर्तों में समानता स्थापित नहीं की थी। याचिका में कोई दम न पाते हुए अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
