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Udhampur News: हत्या के प्रयास के आरोपियों को राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज
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उधमपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने आपराधिक साजिश, जानलेवा हमले और शस्त्र अधिनियम के गंभीर मामले में नामजद आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपराध की जघन्य प्रकृति और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ही रखने का निर्णय सुनाया।
मामला 11 मार्च का है जब रेहंबल थाना क्षेत्र के अंतर्गत जिब स्थित दुकान के पास नरेश कुमार नामक व्यक्ति पर हमला हुआ था। पीड़ित के भाई मनोहर लाल की शिकायत के अनुसार राजू फाइटर, उसके बेटे अक्षय, शुभम, मोहित और अंकुश (गजनी) ने साजिशन चाकू और बेसबॉल से नरेश कुमार को जान से मारने की कोशिश की। जांच के दौरान अंकुश की निशानदेही पर हमले में प्रयुक्त हथियार, इनोवा कार और मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं।
बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष हैंं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। आरोपी परिवार में एकमात्र कमाने वाले हैं और एक महीने की हिरासत के बावजूद पीड़ित का बयान दर्ज न होना जांच की सुस्ती को दर्शाता है। उन्होंने जमानत नियम और जेल अपवाद के सिद्धांत का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच प्रारंभिक चरण में है और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों को रिहा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा और वे गवाहों को डरा-धमका सकते हैं।
उपचाराधीन पीड़ित का बयान दर्ज होना अभी बाकी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि ऐसे हिंसक अपराध व्यक्तिगत द्वेष और कानून के प्रति अवहेलना को दर्शाते हैं। न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि पीड़ित अभी भी उपचाराधीन है और उसका बयान दर्ज होना बाकी है। ऐसी स्थिति में आरोपियों की रिहाई न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है बल्कि न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को भी कमजोर कर सकती है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपियों को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।
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मामला 11 मार्च का है जब रेहंबल थाना क्षेत्र के अंतर्गत जिब स्थित दुकान के पास नरेश कुमार नामक व्यक्ति पर हमला हुआ था। पीड़ित के भाई मनोहर लाल की शिकायत के अनुसार राजू फाइटर, उसके बेटे अक्षय, शुभम, मोहित और अंकुश (गजनी) ने साजिशन चाकू और बेसबॉल से नरेश कुमार को जान से मारने की कोशिश की। जांच के दौरान अंकुश की निशानदेही पर हमले में प्रयुक्त हथियार, इनोवा कार और मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं।
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बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष हैंं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। आरोपी परिवार में एकमात्र कमाने वाले हैं और एक महीने की हिरासत के बावजूद पीड़ित का बयान दर्ज न होना जांच की सुस्ती को दर्शाता है। उन्होंने जमानत नियम और जेल अपवाद के सिद्धांत का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच प्रारंभिक चरण में है और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों को रिहा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा और वे गवाहों को डरा-धमका सकते हैं।
उपचाराधीन पीड़ित का बयान दर्ज होना अभी बाकी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि ऐसे हिंसक अपराध व्यक्तिगत द्वेष और कानून के प्रति अवहेलना को दर्शाते हैं। न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि पीड़ित अभी भी उपचाराधीन है और उसका बयान दर्ज होना बाकी है। ऐसी स्थिति में आरोपियों की रिहाई न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है बल्कि न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को भी कमजोर कर सकती है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपियों को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।