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Udhampur News: किताब छोड़ पकड़ा झाड़ू और घूमा रहे करछी, गद्दी सिप्पी छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं की कमी

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gadii sippy hostel, basic amenities
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उधमपुर। गद्दी सिप्पी छात्रावास की बदहाली आदिवासी और पिछड़े वर्ग के उत्थान के दावों की पोल खोल रही है। यहां रहने वाले करीब 46 छात्र मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आलम यह है कि स्थायी कुक और सफाई कर्मचारी न होने के कारण छात्रों को किताब छोड़कर झाड़ू पकड़ना पड़ रहा है। साथ ही चूल्हा फूंककर करछी घूमा रहे हैं।
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हॉस्टल में रहने वाले छात्र आदिश कुमार, नरेश कुमार, देव राज, जगदेव सिंह, पवन कुमार और सक्षम ने प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए बताया कि संस्थान में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। उनका आरोप है कि हॉस्टल में सफाई कर्मचारी न होने के कारण गंदगी का अंबार है। दूसरे हॉस्टल से सफाई कर्मचारी को हफ्ते में केवल एक या दो बार भेजा जाता है। इस कारण खुद मिलकर सफाई करनी पड़ती है।
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छात्र देव राज ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर हम दिनभर खाना बनाने और सफाई करने में ही लगे रहेंगे तो पढ़ाई कब करेंगे? कई बार आवाज उठाई लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिला। हॉस्टल में वैसे तो दो कुक तैनात हैं लेकिन वे स्थायी नहीं हैं। छात्र आदिश कुमार ने बताया कि ये कर्मचारी अक्सर अन्य जगहों पर काम करने चले जाते हैं जिस कारण समय पर खाना नहीं बन पाता। इस कारण छात्रों को खुद ही रसोई संभालनी पड़ती है।

पोषण के नाम पर खानापूर्ति, गुज्जर हॉस्टल पर बढ़ी निर्भरता
छात्रावास में सेहत के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। छात्रों के अनुसार उन्हें पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा है। हॉस्टल का राशन गुज्जर हॉस्टल से मंगवाया जाता है जिसमें अक्सर जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है। जगदेव सिंह का कहना है कि असंतुलित आहार और गंदगी के कारण कई छात्र अक्सर बीमार पड़ जाते हैं। इस कारण वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।



स्वीकृत पदों को भरने के लिए भेजा प्रस्ताव
जब इस अव्यवस्था के बारे में प्रबंधन से बात की गई तो उन्होंने स्टाफ की कमी को स्वीकार किया। वार्डन रमेश कुमार ने बताया कि स्वीकृत पदों की संख्या बेहद कम है जिस कारण समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने इस संबंध में निदेशक से बात की है और जल्द समाधान की उम्मीद जताई है। आदिवासी मामलों के निदेशक मुमताज अली चौधरी ने कहा कि स्वीकृत पदों को भरने के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि जब तक स्थायी स्टाफ नहीं आता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की गई है ताकि बच्चों को परेशानी न हो।
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