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Udhampur News: जीएमसी की कार्यप्रणाली पर भड़का व्यापार मंडल, स्वास्थ्य मंत्री का फूंका पुतला
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उधमपुर। व्यापार मंडल ने जीएमसी उधमपुर की इमरजेंसी में शुक्रवार रात मरीज की मौत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मरीज की मौत डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और लापरवाही के कारण हुई है। इसके चलते प्रदर्शनकारियों ने जीएमसी में लगातार बढ़ रही अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बस स्टैंड में स्वास्थ्य मंत्री सकिना इत्तू का पुतला भी जलाया।
व्यापार मंडल अध्यक्ष जतिंद्र बरमानी की अध्यक्षता में मंडल के सदस्यों व स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य मंत्री का पुतला जलाकर व नारेबाजी कर अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान चेयरमैन विक्रम सिंह सलाथिया ने कहा कि जीएमसी सिर्फ नाम का मेडिकल काॅलेज बनकर रह गया है। इमरजेंसी में न तो डाक्टर उपलब्ध होते हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि आए दिन ऐसी लापरवाही के कारण मरीजों की मौत हो रही है और अधिकांश मरीजों को मजबूरी में जम्मू या अन्य अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
अध्यक्ष जितेंद्र वरमानी ने बताया कि अस्पताल में कई जरूरी मशीनें या तो हैं ही नहीं या खराब पड़ी हैं। वरिष्ठ डाक्टर अक्सर जम्मू में रहते हैं और अस्पताल की जिम्मेदारी जूनियर डाक्टरों पर छोड़ दी जाती है और रात के समय दो डाॅक्टरों को ही तैनात किया जाता है लेकिन वह भी ड्यूटी के समय उपलब्ध नहीं होते हैं जिससे मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस लापरवाही के चलते कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है। लेकिन आज तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जीएमसी उधमपुर में डाॅक्टरों की स्थायी नियुक्ति की जाए, मशीनों की जांच और मरम्मत हो तथा डाक्टरों का सही रोस्टर तैयार किया जाए। साथ ही उन्होंने विधायक और प्रशासन से भी अपील की है कि विधानसभा सत्र में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं फिर न हों। प्रदर्शन में कोषाध्यक्ष जतिंदर गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य अश्वनी बेगडा, विशाल खजूरिया आदि मौजूद थे।
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व्यापार मंडल अध्यक्ष जतिंद्र बरमानी की अध्यक्षता में मंडल के सदस्यों व स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य मंत्री का पुतला जलाकर व नारेबाजी कर अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान चेयरमैन विक्रम सिंह सलाथिया ने कहा कि जीएमसी सिर्फ नाम का मेडिकल काॅलेज बनकर रह गया है। इमरजेंसी में न तो डाक्टर उपलब्ध होते हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि आए दिन ऐसी लापरवाही के कारण मरीजों की मौत हो रही है और अधिकांश मरीजों को मजबूरी में जम्मू या अन्य अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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अध्यक्ष जितेंद्र वरमानी ने बताया कि अस्पताल में कई जरूरी मशीनें या तो हैं ही नहीं या खराब पड़ी हैं। वरिष्ठ डाक्टर अक्सर जम्मू में रहते हैं और अस्पताल की जिम्मेदारी जूनियर डाक्टरों पर छोड़ दी जाती है और रात के समय दो डाॅक्टरों को ही तैनात किया जाता है लेकिन वह भी ड्यूटी के समय उपलब्ध नहीं होते हैं जिससे मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस लापरवाही के चलते कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है। लेकिन आज तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जीएमसी उधमपुर में डाॅक्टरों की स्थायी नियुक्ति की जाए, मशीनों की जांच और मरम्मत हो तथा डाक्टरों का सही रोस्टर तैयार किया जाए। साथ ही उन्होंने विधायक और प्रशासन से भी अपील की है कि विधानसभा सत्र में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं फिर न हों। प्रदर्शन में कोषाध्यक्ष जतिंदर गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य अश्वनी बेगडा, विशाल खजूरिया आदि मौजूद थे।