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Udhampur News: -देविका में गिरने वाले गंदे नालों पर नहीं लग पाई रोक, आस्था पर चोट

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गाद से गंदगी से पटी पवित्र देविका - फोटो : udhampur news
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उधमपुर। जिले की आस्था और सांस्कृतिक धरोहर मानी जाने वाली पवित्र देविका नदी की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के अंतर्गत 187 करोड़ रुपये की महत्त्वाकांक्षी परियोजना हाल ही में पूर्ण की गई है। इस परियोजना के तहत आधुनिक सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), घाटों का सौंदर्यीकरण तथा पार्कों का निर्माण कर प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर के भीतर गंगेडा से ओमाडा मोड़ तक लगभग 5 किलोमीटर के नदी क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त एवं संरक्षित बनाना है। इसके बावजूद शहर के कई गंदे नालों के सीधे देविका नदी में गिरने पर अब तक प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। ये नाले प्रतिदिन सैकड़ों टन गंदगी नदी में प्रवाहित कर रहे हैं, जिससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच रही है, बल्कि नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिक संतुलन भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
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ये नाले समस्या के मुख्य कारण
हाउसिंग कॉलोनी, मीट मार्केट, एमएच रोड स्थित टीबी अस्पताल के निकट तथा आदर्श कॉलोनी से एमएच की ओर बहने वाले प्रमुख नाले इस समस्या के मुख्य कारण हैं। ये नाले शहर की लगभग एक चौथाई गंदगी को सीधे देविका नदी तक पहुंचाते हैं। इनमें मल, कीचड़, जूते, शराब की खाली बोतलें और शहर से उत्सर्जित होने वाले लगभग सभी किस्म के कचरे के अंश शामिल होते हैं। इसके अलावा हाउसिंग काॅलोनी में रेहम्ती रोड़ के साथ देविका किनारे कचरे का बड़ा पहाड़ तैयार हो चुका है।
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देविका नदी की स्वच्छता को लेकर उचित कदम नहीं उठाए जा रहे
महाशिवरात्रि, रामनवमी, मकर सक्रांति और बैसाखी जैसे खास धार्मिक अवसरों पर पवित्र देविका में स्नान, दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। प्रशासन घाटों पर साफ सफाई के प्रबंध तो करती है लेकिन पवित्र देविका नदी की स्वच्छता को लेकर उचित कदम नहीं उठाए जाने के कारण श्रद्धालुओं को मजबूरन इसी गाद और गंदगी से मिश्रित जल में स्नान और धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने पड़ते हैं। हैरानगी इस बात की है कि प्रशासन स्वयं भी इसी गंदगी से पटी देविका नदी की नमामि गंगा की तर्ज पर संध्या आरती भी आयोजित करता है।

उल्लेखनीय है कि पवित्र देविका नदी, शहर के भीतर गंगेडा से प्रस्फुटित होकर ओमाडा मोड़ तक की लगभग पांच किलोमीटर की अपनी यात्रा पूरी करती है। इसके बाद स्वत: लुप्त हो जाती है। आगे शहर से बाहरी इलाके नैनसू में दोबारा नजर आती है। नीलमत पुराण में भी इसका वर्णन है। गंगा की बड़ी बहन कही जाने वाली पवित्र देविका नदी के तट पर अंतिम संस्कार से मोक्ष की मान्यता है। जहां अस्थियां स्वतः विलीन हो जाती हैं।

कोटअपने नगर परिषद के कार्यकाल के दौरान इस मुद्दे के समाधान का प्रस्ताव पारित किया गया था। इन नालों को डायवर्ट करने का प्रयास किया गया था। प्रशासन को इस पर योजना बनाकर काम करना चाहिए।
-विक्रम सिंह सलाथिया, पूर्व पार्षद


यह आस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। शहर के गंदे नालों का पवित्र नदी में गिरना चिंताजनक है। इस पर रोक लगाने के लिए तत्काल उचित कदम उठाए जाने चाहिएं। हम लगातार इसकी मांग करते आए हैं।
-जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष व्यापार मंडल उधमपुर


पवित्र देविका नदी को हम मां गंगा के समान पूजते हैं। खास धार्मिक अवसरों पर इसे जल से स्नान और अपने सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे करते हैं। इसलिए गंदे नालों का इसमें गिरना आस्था पर भी ठेस पहुंचाता है। प्रशासन को इस पर रोक लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिएं।
-दीपिका भारद्वाज, स्थानीय निवासी


देविका को स्वच्छ रखने के लिए प्रशासन की तरफ से हर संभव प्रयास किए जा रहें हैं और इसके तहत नालों को डायवर्ट करने की भी योजना है। जिस पर जल्द काम किया जाएगा।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ, नगर परिषद उधमपुर



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