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Udhampur News: बंदरों के बढ़ते आतंक से खेती पर संकट, किसान परेशान
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पौनी। पंचायत माड़ी नाला के किसान इस वर्ष मक्की की बुआई को लेकर गहरी चिंता में हैं। क्षेत्र में बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण किसानों को अपनी फसलों के नुकसान का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से बंदरों की तरफ से खेतों में बोई गई मक्की की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इससे उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय किसान मदन लाल और विधियां शर्मा ने बताया कि बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर मक्की की फसल को उखाड़ देते हैं और तैयार फसल को भी नष्ट कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ खाद्यान्न संकट का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खेती ही ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन है, लेकिन लगातार हो रहे नुकसान के कारण अब किसान मक्की की खेती करने से भी हिचक रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यदि वे मक्की की फसल नहीं लगाते हैं तो पशुओं के चारे और घरेलू जरूरतों के लिए अनाज की समस्या खड़ी हो जाएगी, वहीं फसल लगाने पर बंदरों द्वारा उसे उजाड़ दिए जाने का डर बना रहता है। इसी दुविधा के चलते क्षेत्र के कई किसानों ने इस बार मक्की की जगह धान की खेती करने का निर्णय लिया है ताकि कम से कम परिवार के लिए चावल की व्यवस्था हो सके।
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ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि बंदरों के बढ़ते आतंक पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि किसान बिना भय के अपनी खेतीबाड़ी कर सकें और उन्हें अपनी मेहनत का उचित फल मिल सके।
स्थानीय किसान मदन लाल और विधियां शर्मा ने बताया कि बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर मक्की की फसल को उखाड़ देते हैं और तैयार फसल को भी नष्ट कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ खाद्यान्न संकट का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खेती ही ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन है, लेकिन लगातार हो रहे नुकसान के कारण अब किसान मक्की की खेती करने से भी हिचक रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि यदि वे मक्की की फसल नहीं लगाते हैं तो पशुओं के चारे और घरेलू जरूरतों के लिए अनाज की समस्या खड़ी हो जाएगी, वहीं फसल लगाने पर बंदरों द्वारा उसे उजाड़ दिए जाने का डर बना रहता है। इसी दुविधा के चलते क्षेत्र के कई किसानों ने इस बार मक्की की जगह धान की खेती करने का निर्णय लिया है ताकि कम से कम परिवार के लिए चावल की व्यवस्था हो सके।
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