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Udhampur News: ऑनलाइन बिलिंग के फेर में फंसी वसूली<bha>;</bha> 7.80 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 5.35 करोड़ रिकवर
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जल शक्ति विभाग के लिए ऑनलाइन बिलिंग प्रणाली बनी गले की फांस, सरकारी विभाग भी बने डिफॉल्टर
उधमपुर। जल शक्ति विभाग के लिए पहली बार लागू की गई ऑनलाइन बिलिंग प्रणाली गले की फांस बनती नजर आ रही है। तकनीकी बदलाव और उपभोक्ताओं को कम जानकारी के कारण विभाग इस वित्तीय वर्ष निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। 31 मार्च के बाद भी करोड़ों रुपये का बकाया अब तक खजाने में नहीं पहुंच सका है।
आंकड़ों के अनुसार 7.80 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा गया था। चेतावनियों और प्रयास के बावजूद विभाग अब तक केवल 5 करोड़ 35 लाख रुपये ही वसूल पाया है। इसका मुख्य कारण ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को माना जा रहा है, जिसे समझने में आम उपभोक्ताओं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि आम जनता ही नहीं बल्कि कई सरकारी विभाग भी पानी के बिलों का भुगतान करने में नाकाम रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों पर बकाया राशि का बड़ा हिस्सा लंबित है जिससे वसूली का ग्राफ गिर गया है। इससे पहले चेतावनी दी थी कि 31 मार्च तक भुगतान न करने पर कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल भुगतान की जटिलताओं के कारण उपभोक्ता समय पर बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग पोर्टल पर लॉगिन करने और ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया को पूरा करने में असमर्थ हैं। विभाग ने अब उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तकनीकी सहायता के लिए कार्यालय से संपर्क करें और जल्द बकाया बिलों का भुगतान करें।
ऑनलाइन प्रणाली का पहला वर्ष है इसलिए उपभोक्ताओं को तकनीकी दिक्कतें आना स्वाभाविक है। लोगों को नई व्यवस्था में ढलने का समय दे रहे हैं इसलिए अभी सख्त कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है। जल्द ही बकायादारों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
-संदीप गुप्ता, एक्सईएन
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उधमपुर। जल शक्ति विभाग के लिए पहली बार लागू की गई ऑनलाइन बिलिंग प्रणाली गले की फांस बनती नजर आ रही है। तकनीकी बदलाव और उपभोक्ताओं को कम जानकारी के कारण विभाग इस वित्तीय वर्ष निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। 31 मार्च के बाद भी करोड़ों रुपये का बकाया अब तक खजाने में नहीं पहुंच सका है।
आंकड़ों के अनुसार 7.80 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा गया था। चेतावनियों और प्रयास के बावजूद विभाग अब तक केवल 5 करोड़ 35 लाख रुपये ही वसूल पाया है। इसका मुख्य कारण ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को माना जा रहा है, जिसे समझने में आम उपभोक्ताओं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि आम जनता ही नहीं बल्कि कई सरकारी विभाग भी पानी के बिलों का भुगतान करने में नाकाम रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों पर बकाया राशि का बड़ा हिस्सा लंबित है जिससे वसूली का ग्राफ गिर गया है। इससे पहले चेतावनी दी थी कि 31 मार्च तक भुगतान न करने पर कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल भुगतान की जटिलताओं के कारण उपभोक्ता समय पर बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग पोर्टल पर लॉगिन करने और ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया को पूरा करने में असमर्थ हैं। विभाग ने अब उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तकनीकी सहायता के लिए कार्यालय से संपर्क करें और जल्द बकाया बिलों का भुगतान करें।
ऑनलाइन प्रणाली का पहला वर्ष है इसलिए उपभोक्ताओं को तकनीकी दिक्कतें आना स्वाभाविक है। लोगों को नई व्यवस्था में ढलने का समय दे रहे हैं इसलिए अभी सख्त कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है। जल्द ही बकायादारों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
-संदीप गुप्ता, एक्सईएन