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Udhampur News: निजी स्कूलों की मनमानी, नर्सरी से 10वीं तक वसूले जा रहे हजारों रुपये
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उधमपुर। शिक्षा विभाग के कड़े निर्देशों और दावों के बावजूद कई निजी स्कूल मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। विभाग द्वारा वार्षिक फीस (एनुअल चार्ज) वसूलने पर लगाई गई रोक के बावजूद के कई निजी शिक्षण संस्थान खुलेआम आदेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया है जिससे मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों में रोष व्याप्त है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन वार्षिक शुल्क के बजाय विकास, प्रबंधन और गतिविधि शुल्क जैसे विभिन्न पैंतरों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। हालांकि मासिक ट्यूशन फीस और अन्य खर्चे अतिरिक्त हैं। कुछ अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वे शुल्क देने में असमर्थता जताते हैं तो बच्चों को कक्षा में बैठने से रोकने की धमकियां दी जाती हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले में 276 निजी स्कूल संचालित हैं। हायर सेकेंडरी 14, हाई स्कूल 48, मिडिल स्कूल 70 और 144 प्राइमरी स्कूल हैं।
कुछ स्कूलों में नर्सरी कक्षा के बच्चों से करीब 8,000, पांचवीं के लिए 5,000 व दसवीं के लिए 6,000 रुपये तक फीस वसूली जा रही है। इसी प्रकार नए प्रवेश के लिए 14,300 रुपये तक लिए जा रहे हैंं जो पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों की फीस से अधिक है।
दूसरी ओर निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गुप्ता के अनुसार सभी निजी स्कूलों की फीस शुल्क निर्धारण समिति के अनुसार ही तय होती है। हर स्कूल की संरचना अलग है इसलिए फीस में अंतर हो सकता है। कोई भी स्कूल मनमाना शुल्क नहीं ले रहा है। फिर भी यदि किसी स्कूल के खिलाफ पुख्ता शिकायत आती है तो हम उस स्कूल को बंद करवाने की सिफारिश करेंगे।
नए सत्र में वसूली जा रही न्यूनतम वार्षिक फीस
कक्षा नई एडमिशन वार्षिक फीस (रेगुलर स्टूडेंट) मासिक फीस
9वीं - 10 वीं 8100 5300 820
6वीं-8वीं 7545 5095 700
1वीं-5वीं 7450 4950 590
नर्सरी-केजी 6730 4060 590
अन्य शुल्क
कंप्यूटर चार्ज : 1300 (पहली से 10वीं)
डिजिटल फंड : 900 ( नर्सरी-यूकेजी)
म्यूजिक फंड : 200 (नर्सरी-10वीं)
सैनिटेशन : 1200 (प्रतिवर्ष)
प्रास्पेक्ट फीस : 100 रुपये
सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शुल्क निर्धारण समिति की ओर से तय की गई फीस ही ली जाए। यदि कोई भी अभिभावक अधिक वसूली की शिकायत लेकर आता है तो जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ।
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अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन वार्षिक शुल्क के बजाय विकास, प्रबंधन और गतिविधि शुल्क जैसे विभिन्न पैंतरों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। हालांकि मासिक ट्यूशन फीस और अन्य खर्चे अतिरिक्त हैं। कुछ अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वे शुल्क देने में असमर्थता जताते हैं तो बच्चों को कक्षा में बैठने से रोकने की धमकियां दी जाती हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले में 276 निजी स्कूल संचालित हैं। हायर सेकेंडरी 14, हाई स्कूल 48, मिडिल स्कूल 70 और 144 प्राइमरी स्कूल हैं।
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कुछ स्कूलों में नर्सरी कक्षा के बच्चों से करीब 8,000, पांचवीं के लिए 5,000 व दसवीं के लिए 6,000 रुपये तक फीस वसूली जा रही है। इसी प्रकार नए प्रवेश के लिए 14,300 रुपये तक लिए जा रहे हैंं जो पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों की फीस से अधिक है।
दूसरी ओर निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गुप्ता के अनुसार सभी निजी स्कूलों की फीस शुल्क निर्धारण समिति के अनुसार ही तय होती है। हर स्कूल की संरचना अलग है इसलिए फीस में अंतर हो सकता है। कोई भी स्कूल मनमाना शुल्क नहीं ले रहा है। फिर भी यदि किसी स्कूल के खिलाफ पुख्ता शिकायत आती है तो हम उस स्कूल को बंद करवाने की सिफारिश करेंगे।
नए सत्र में वसूली जा रही न्यूनतम वार्षिक फीस
कक्षा नई एडमिशन वार्षिक फीस (रेगुलर स्टूडेंट) मासिक फीस
9वीं - 10 वीं 8100 5300 820
6वीं-8वीं 7545 5095 700
1वीं-5वीं 7450 4950 590
नर्सरी-केजी 6730 4060 590
अन्य शुल्क
कंप्यूटर चार्ज : 1300 (पहली से 10वीं)
डिजिटल फंड : 900 ( नर्सरी-यूकेजी)
म्यूजिक फंड : 200 (नर्सरी-10वीं)
सैनिटेशन : 1200 (प्रतिवर्ष)
प्रास्पेक्ट फीस : 100 रुपये
सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शुल्क निर्धारण समिति की ओर से तय की गई फीस ही ली जाए। यदि कोई भी अभिभावक अधिक वसूली की शिकायत लेकर आता है तो जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ।