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Udhampur News: हर उम्र के लोगों को जकड़ रहा थायराइड, जीवनशैली में बदलाव मुख्य कारण
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- समय पर इलाज और पौष्टिक आहार से रोग हो सकता है नियंत्रित
उधमपुर। पहले थायराइड की समस्या जहां अधिकतर बड़ी उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी, अब बीमारी बच्चों और युवाओं में तेजी से फैल रही है। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और बढ़ता तनाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार समय पर पहचान और उपचार से बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी लेकिन अब बच्चों और युवाओं में भी मामले आ रहे हैं। थायराइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोन कम बनता है। इसके लक्षणों में अचानक वजन बढ़ना, अत्यधिक थकान, सुस्ती, ठंड लगना और बालों का झड़ना शामिल है। हाइपरथायराइडिज्म में हार्मोन की अधिकता हो जाती है। इसके लक्षणों में घबराहट, वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, नींद न आना और ज्यादा पसीना आना प्रमुख है।
दोनों ही स्थितियां शरीर के संतुलन को बिगाड़ देती हैं और समय पर इलाज न होने पर गंभीर रूप ले सकती हैं। बीमारी की जांच टी3, टी4 और टीएसएच ब्लड टेस्ट के जरिए की जाती है। यदि बीमारी की पुष्टि होती है तो डॉक्टरों द्वारा दवाएं निर्धारित की जाती हैं। दवा 24 घंटे में एक ही बार सुबह खाली पेट लेनी चाहिए और इसके बाद कम से कम 30 मिनट तक कुछ भी खाने-पीने से परहेज करना चाहिए। सही उपचार से छह माह में लक्षण कम होने लगते हैं। हालांकि कई मामलों में लंबे समय तक दवा का सेवन अनिवार्य होता है।
डॉ. सुदेश रैना (बाल रोग विशेषज्ञ) के अनुसार शरीर की नियमित जांच और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाते रहें ताकि हार्मोन के स्तर को नियंत्रित रखा जा सके। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। रोजाना व्यायाम या योग करें।
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उधमपुर। पहले थायराइड की समस्या जहां अधिकतर बड़ी उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी, अब बीमारी बच्चों और युवाओं में तेजी से फैल रही है। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और बढ़ता तनाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार समय पर पहचान और उपचार से बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी लेकिन अब बच्चों और युवाओं में भी मामले आ रहे हैं। थायराइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोन कम बनता है। इसके लक्षणों में अचानक वजन बढ़ना, अत्यधिक थकान, सुस्ती, ठंड लगना और बालों का झड़ना शामिल है। हाइपरथायराइडिज्म में हार्मोन की अधिकता हो जाती है। इसके लक्षणों में घबराहट, वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, नींद न आना और ज्यादा पसीना आना प्रमुख है।
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दोनों ही स्थितियां शरीर के संतुलन को बिगाड़ देती हैं और समय पर इलाज न होने पर गंभीर रूप ले सकती हैं। बीमारी की जांच टी3, टी4 और टीएसएच ब्लड टेस्ट के जरिए की जाती है। यदि बीमारी की पुष्टि होती है तो डॉक्टरों द्वारा दवाएं निर्धारित की जाती हैं। दवा 24 घंटे में एक ही बार सुबह खाली पेट लेनी चाहिए और इसके बाद कम से कम 30 मिनट तक कुछ भी खाने-पीने से परहेज करना चाहिए। सही उपचार से छह माह में लक्षण कम होने लगते हैं। हालांकि कई मामलों में लंबे समय तक दवा का सेवन अनिवार्य होता है।
डॉ. सुदेश रैना (बाल रोग विशेषज्ञ) के अनुसार शरीर की नियमित जांच और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाते रहें ताकि हार्मोन के स्तर को नियंत्रित रखा जा सके। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। रोजाना व्यायाम या योग करें।