एक जोर की आवाज: 12 सेकंड में ढह गई 15 फीट की सुरक्षा दीवार, तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत, लापरवाही या हादसा?
खड्ड में काम कर रहे मजदूरों पर अचानक 15 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार महज 12 सेकंड में ढह गई, तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई।
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दोपहर के करीब तीन बजे थे, सब कुछ सामान्य था लेकिन अगले ही पल एक ऐसी खौफनाक आवाज हुई जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। यह किसी धमाके की आवाज नहीं बल्कि मौत की दस्तक थी। महज 12 सेकंड के भीतर 15 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार भरभराकर ढह गई।
खड्ड की गहराई में पसीना बहा रहे मजदूरों को संभलने का एक पल भी नसीब नहीं हुआ और पलक झपकते ही हंसती-खेलती तीन जिंदगियां मलबे के ढेर के नीचे जिंदा दफन हो गईं। उच्च अधिकारियों को सौंपी गई प्राथमिक रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। लोक निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार सबसे पहले एक पिलर का हिस्सा अलग हुआ। मलबा ढहता देख खड्ड से बाहर काम कर रहे मजदूरों ने शोर मचाना शुरू किया। उनकी आवाज साथियों तक पहुंचती, इससे पहले कई जिंदगियां मलबे ढेर में दब गईं जिनमें तीन की माैत हो गई। सूत्रों ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। शाम चार बजे मलबे के ढेर से पहले एक मजदूर को निकाला गया।
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा पहले ही हटा दिया होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। पिलर के साथ सड़क से पानी रिसाव वाली जगह से मिट्टी गिरी। गीली मिट्टी को हटाने में जेसीबी से भी काफी समय लगा। मिट्टी इतनी तेजी से गिरी है कि संभलने का मौका नहीं मिला है।
टुकड़ों में मिला राजकुमार का शव, रात एक बजे खत्म हुआ बचाव अभियान
बनतालाब स्थित ठठर इलाके में पुल गिरने से हुए भीषण हादसे में राहत और बचाव कार्य का अंत बेहद दर्दनाक रहा। मलबे में सबसे नीचे दबे राजकुमार का शव घटना के कई घंटों बाद क्षत-विक्षत बरामद किया गया।
अत्यधिक गहराई में दबे होने और बचाव के दाैरान जेसीबी की चपेट में आने से उनका सिर और हाथ अलग हो गए थे। शव देख मौके पर मौजूद हर शख्स की रूह कंपा दी।
ठठर में निर्माणाधीन पुल के ढहने के बाद से ही रेस्क्यू टीमें राजकुमार की तलाश में जुटी थीं। मलबे के भारी ढेर के नीचे सबसे निचली सतह पर दबे होने के कारण उन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। अंततः शनिवार रात करीब एक बजे भारी मशक्कत के बाद उनका शव बाहर निकाला जा सका। दुर्भाग्यवश, रेस्क्यू के दौरान जेसीबी के उपयोग और मलबे के दबाव की चपेट में आने से राजकुमार का शव हिस्सों में बंट गया था। बचाव कर्मियों को उनका सिर और हाथ शरीर से अलग मिले।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे की गहराई और भारी गाद के चलते शव की शिनाख्त करना भी मुश्किल हो रहा था। राजकुमार इस हादसे में दबे अंतिम व्यक्ति थे जिनका शव मिलते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त घोषित किया।
