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Jammu News: पुंछ में छात्रों को तीसरी भाषा चुनने की दी जाए स्वतंत्रता
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एबीवीपी ने की जिले में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पूर्ण रूप से लागू करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पुंछ जिले में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की है। मांग है कि पुंछ में विद्यार्थियों को उनकी इच्छा से तीसरी भाषा चुनने का विकल्प दिया जाए।
नगर में रविवार को एबीवीपी के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता की। चेतावनी दी कि अगर तीन दिन में मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन करेंगे। आदित्य सिंह चंदेल, श्रुति खजूरिया, वैश्नवी शर्मा, प्रणव शर्मा और अंशी सूदन ने आरोप लगाया कि जिले में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सही प्रकार लागू नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थियों को त्रिभाषा का विकल्प दिया गया है। इसमें वे एक भाषा को अपनी इच्छा से चुने सकता है लेकिन पुंछ में तीन भाषा का विकल्प ही नहीं है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में दूसरी भाषा के ताैर पर उर्दू ही थोपी जा रही है जो शिक्षा नीति का उल्लंघन है। जो विद्यार्थी संस्कृत, पंजाबी, डोगरी और पहाड़ी भाषा पढ़ना चाहते हैं उन्हें भी उर्दू पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक भी परेशान हैं। इसके लिए डीसी पुंछ को भी ज्ञापन सौंपा है।
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पुंछ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पुंछ जिले में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की है। मांग है कि पुंछ में विद्यार्थियों को उनकी इच्छा से तीसरी भाषा चुनने का विकल्प दिया जाए।
नगर में रविवार को एबीवीपी के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता की। चेतावनी दी कि अगर तीन दिन में मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन करेंगे। आदित्य सिंह चंदेल, श्रुति खजूरिया, वैश्नवी शर्मा, प्रणव शर्मा और अंशी सूदन ने आरोप लगाया कि जिले में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सही प्रकार लागू नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थियों को त्रिभाषा का विकल्प दिया गया है। इसमें वे एक भाषा को अपनी इच्छा से चुने सकता है लेकिन पुंछ में तीन भाषा का विकल्प ही नहीं है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में दूसरी भाषा के ताैर पर उर्दू ही थोपी जा रही है जो शिक्षा नीति का उल्लंघन है। जो विद्यार्थी संस्कृत, पंजाबी, डोगरी और पहाड़ी भाषा पढ़ना चाहते हैं उन्हें भी उर्दू पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक भी परेशान हैं। इसके लिए डीसी पुंछ को भी ज्ञापन सौंपा है।
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