हादसे में हाथ गंवा बैठी 13 साल की कीर्ति: फाइलों में दफन हो रहा इंसाफ, डेढ़ महीने बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर
बाड़ी ब्राह्मणा में हाई टेंशन लाइन से हुए हादसे में 13 वर्षीय कीर्ति ने अपना एक हाथ गंवा दिया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद डेढ़ महीने बाद भी मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
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विभाग की नाकामी का आलम यह है कि कीर्ति के पिता सुरेश जब न्याय की गुहार लेकर दर-दर भटक रहे हैं, तो उन्हें इंसाफ के बजाय टालमटोल परोसा जा रहा है। सुरेश का आरोप है कि बिजली विभाग अपनी गर्दन बचाने के लिए उनसे मिलीभगत की साजिश रच रहा है। कभी विभाग अंग्रेजी की अर्जी पर आपत्ति जताता है तो कभी उन्हें मजबूर किया जाता है कि वे शिकायत में ‘तार टूटने’ का जिक्र न करें। यह सिर्फ एक तकनीकी पेंच नहीं, बल्कि सबूत मिटाने की कोशिश है। जब अस्पताल के डॉक्टरों ने स्वयं पत्र लिखकर विभाग की लापरवाही को रेखांकित किया, तब जाकर विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटी, लेकिन वह भी केवल दिखावे के लिए।
दोनों पक्षों में समझौते का दावा... जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा
सबसे बड़ा सवाल उस पुलिस का है जिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा है। एक गंभीर हादसे के बाद भी एफआईआर दर्ज न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस का यह तर्क कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है... ये पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सुरेश का सवाल है कि क्या आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक पिता के पास अपनी बच्ची के इलाज के लिए विभाग द्वारा दिए गए थोड़े-बहुत पैसों को स्वीकार करने के सिवाय कोई विकल्प न बचा था? पुलिस का यह रुख कि ‘शिकायतकर्ता खुद थाने आए’, संवेदनहीनता दर्शाता है।
सवाल... कीर्ति को हक मिलेगा भी या नहीं, जवाब किसी के पास नहीं
सवाल यह है कि क्या विभाग का यह ‘औने-पौने’ इलाज का खर्च कीर्ति की जिंदगी की भरपाई नहीं कर सकता। बिना एफआईआर के यह मामला कानूनी फाइलों में कभी ‘लापरवाही’ के तौर पर दर्ज ही नहीं होगा और कीर्ति को वह हक कभी नहीं मिलेगा जिससे वह जीवन भर दूसरों की मोहताज न रहे। लड़की के पिता को इस बात की आशंका सता रही है कि प्रशासन और सत्ता के गलियारों में बैठे जिम्मेदार, एक मासूम की बर्बाद होती जिंदगी को बचाने के लिए जब तक जागेंगे, तब तक बहुत देर न हो जाए?
अधिकारियों के अपने-अपने तर्क
बाड़ी ब्राह्मणा के थाना प्रभारी संदीप सिंह चिब ने स्पष्ट किया कि मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उनका कहना है कि पुलिस के पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है और दोनों पक्ष इलाज के खर्च पर सहमत हैं।
बिजली विभाग के एईई संजीव सुमन ने दावा किया कि उन्होंने हादसे की सूचना उच्च अधिकारियों, तहसीलदार और थाना प्रभारी को दे दी है और मुआवजे के लिए रिपोर्ट इंस्पेक्शन विंग को भेज दी गई है।