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Jammu News: शहीद की पत्नी आरती ठाकुर ने संघर्ष से लड़ी जंग, वर्दी में संभाला हर मोर्चा
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इंस्पेक्टर आरती ठाकुर। श्रोत स्वयं
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जम्मू। आतंक जब चरम पर था, तब जम्मू भी अछूता नहीं था। वर्ष 2002 में रायका वन्य क्षेत्र के निकट आतंकियों की गोली का निशाना बनकर सब इंस्पेक्टर रणधीर सिंह ठाकुर शहीद हो गए थे। उनकी शादी को मात्र दो वर्ष हुए थे और पत्नी आरती ठाकुर गर्भवती थीं। उनके शहीद होते ही मानो आरती का पूरा संसार उजड़ गया हो। महीनों गम के बीच खुद को संभाला और हिम्मत दिखाते हुए पुलिस में भर्ती होने की ठानी। इस बीच बेटा पैदा हुआ और परवरिश करते हुए हर मोर्चे पर खुद को साबित कर वर्दी के काबिल बन गईं।
इंस्पेक्टर आरती ठाकुर ने बताया कि पति की मौत के बाद बेटे राघव ठाकुर का जन्म हुआ। उसके पालन पोषण के बीच पुलिस परीक्षा से घबराई नहीं। ढृढ़ संकल्प लिया कि जिस पुलिस की वर्दी में पति शहीद हुए हैं, उसी वर्दी को पहनकर समाज में पति के सपने को पूरा करेगी। वर्ष 2005 में कड़ी मेहनत के बाद वर्दी पहनी। कुछ समय पहले तक गांधी नगर स्थित महिला थाने की इंचार्ज रहीं। वर्तमान में यातायात विभाग में इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। बेटा राघव ठाकुर दिल्ली स्थित हंसराज कॉलेज से पढ़ाई कर रहा है।
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खुद को साबित करने के अलावा नहीं था विकल्प
आरती ने कहा कि जीवन में संघर्ष उस मोड़ पर आया जब हताश व चारों तरफ निराशा के सिवाए कुछ नहीं था। ऐसे समय खुद को साबित करने के अलावा कोई विकल्प और नहीं था। इंस्पेक्टर आरती ठाकुर की जिंदगी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला थानाध्यक्ष के तौर पर हमेशा ही लक्ष्य रहा कि घरेलू हिंसा व सामाजिक उत्पीड़ित महिला को न्याय दिलाएं।
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इंस्पेक्टर आरती ठाकुर ने बताया कि पति की मौत के बाद बेटे राघव ठाकुर का जन्म हुआ। उसके पालन पोषण के बीच पुलिस परीक्षा से घबराई नहीं। ढृढ़ संकल्प लिया कि जिस पुलिस की वर्दी में पति शहीद हुए हैं, उसी वर्दी को पहनकर समाज में पति के सपने को पूरा करेगी। वर्ष 2005 में कड़ी मेहनत के बाद वर्दी पहनी। कुछ समय पहले तक गांधी नगर स्थित महिला थाने की इंचार्ज रहीं। वर्तमान में यातायात विभाग में इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। बेटा राघव ठाकुर दिल्ली स्थित हंसराज कॉलेज से पढ़ाई कर रहा है।
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खुद को साबित करने के अलावा नहीं था विकल्प
आरती ने कहा कि जीवन में संघर्ष उस मोड़ पर आया जब हताश व चारों तरफ निराशा के सिवाए कुछ नहीं था। ऐसे समय खुद को साबित करने के अलावा कोई विकल्प और नहीं था। इंस्पेक्टर आरती ठाकुर की जिंदगी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला थानाध्यक्ष के तौर पर हमेशा ही लक्ष्य रहा कि घरेलू हिंसा व सामाजिक उत्पीड़ित महिला को न्याय दिलाएं।