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हर आर्थिक अपराध में जमानत रद्द नहीं हो सकती : हाईकोर्ट
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध का आरोप होने से किसी आरोपी को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर फैसला तथ्यों, आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। इसी टिप्पणी के साथ धोखाधड़ी और संगठित अपराध से जुड़े मामले में आरोपी को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति संजय धर ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक अपराध के मामलों में प्रत्येक मामले की परिस्थितियों का अलग-अलग आकलन किया जाए। केवल यह तथ्य कि मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा है, जमानत से इनकार का आधार नहीं बन सकता।
मामला अनंतनाग थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी मोहम्मद इकबाल वानी और उसके सहयोगियों ने जंगली लहसुन की आपूर्ति के नाम पर लाखों रुपये लिए लेकिन न तो माल उपलब्ध कराया और न ही रकम लौटाई। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी और उसके साथियों ने लोगों को ठगने के लिए कई फर्मों का इस्तेमाल किया और करोड़ों का लेनदेन किया। सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी गंभीर आर्थिक अपराध और संगठित अपराध से जुड़े मामले में शामिल है। उसके रिहा होने से जांच प्रभावित हो सकती है।
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हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी करीब आठ महीने से न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में दोहराया कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। हाईकोर्ट ने आरोपी को एक लाख रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति संजय धर ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक अपराध के मामलों में प्रत्येक मामले की परिस्थितियों का अलग-अलग आकलन किया जाए। केवल यह तथ्य कि मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा है, जमानत से इनकार का आधार नहीं बन सकता।
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मामला अनंतनाग थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी मोहम्मद इकबाल वानी और उसके सहयोगियों ने जंगली लहसुन की आपूर्ति के नाम पर लाखों रुपये लिए लेकिन न तो माल उपलब्ध कराया और न ही रकम लौटाई। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी और उसके साथियों ने लोगों को ठगने के लिए कई फर्मों का इस्तेमाल किया और करोड़ों का लेनदेन किया। सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी गंभीर आर्थिक अपराध और संगठित अपराध से जुड़े मामले में शामिल है। उसके रिहा होने से जांच प्रभावित हो सकती है।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी करीब आठ महीने से न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में दोहराया कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। हाईकोर्ट ने आरोपी को एक लाख रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।