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Jammu News: आपसी विश्वास से सुलझेंगे ईपीएफओ से जुड़े विवाद
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- नियोक्ताओं के जुर्माने के मामले निपटाने के लिए ईपीएफओ लाया विश्वास-2026 योजना
- केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पहली बार लागू होगी यह योजना
- दो महीने से कम और चार माह से अधिक बकाया पर जुर्माने की राशि काफी कम की गई
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने नियोक्ताओं के साथ आपसी विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विश्वास-2026 विशेष योजना की शुरुआत की है। इस अनूठी पहल के तहत कानूनी उलझनों के बजाय भरोसे के आधार पर जुर्माना संबंधी लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाएगा। 29 जून से अगले छह माह के लिए पूरे देश के लिए शुरू की गई यह योजना जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पहली बार लागू होगी।
विश्वास-2026 योजना के तहत लंबित मामलों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें न्यायालयों में विचाराधीन मामले, धारा 14बी के अंतिम आदेश वाले मामले (आरआरसी सहित), नोटिस जारी होने वाले निर्णय पूर्व और ऐसे मामले जिनमें अभी नोटिस जारी नहीं हुआ है। इन सभी पर योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विचार होगा।
इसका लाभ लेने के लिए नियोक्ताओं को पहले धारा 7क्यू के तहत पूरी बकाया ब्याज राशि जमा करनी होगी। साथ में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निस्तारण के बाद किसी न्यायिक या अर्धन्यायिक स्तर पर अपील नहीं की जाएगी। धोखाधड़ी, गबन, रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर, विवादित ब्याज का भुगतान नहीं करने वाले तथा जिन मामलों में हर्जाना पहले ही पूरी तरह वसूल किया जा चुका है उन्हें योजना से बाहर रखा गया है।
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नियोक्ताओं की सुविधा के लिए ईपीएफओ जम्मू कार्यालय पर हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। स्पष्ट किया गया है कि सभी आवेदन ईपीएफओ एम्प्लायर पोर्टल पर डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) या ई-साइन के माध्यम से ऑनलाइन जमा होंगे।
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जुर्माने की संशोधित दरें
- दो महीने से कम डिफॉल्ट : 0.25% प्रतिमाह
- दो से चार महीने से कम : 0.50% प्रतिमाह
- चार महीने या उससे अधिक : 1.00% प्रतिमाह
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ईपीएफओ जम्मू के क्षेत्रीय आयुक्त सुमित सिंह ने कहा कि योजना का उद्देश्य लंबित विवादों का पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान करना है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा। स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा। नियोक्ताओं और ईपीएफओ के बीच विश्वास मजबूत होगा। नियोक्ताओं से अनुरोध है कि वह इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।
-सुमित सिंह, क्षेत्रीय आयुक्त ईपीएफओ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख
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- केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पहली बार लागू होगी यह योजना
- दो महीने से कम और चार माह से अधिक बकाया पर जुर्माने की राशि काफी कम की गई
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने नियोक्ताओं के साथ आपसी विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विश्वास-2026 विशेष योजना की शुरुआत की है। इस अनूठी पहल के तहत कानूनी उलझनों के बजाय भरोसे के आधार पर जुर्माना संबंधी लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाएगा। 29 जून से अगले छह माह के लिए पूरे देश के लिए शुरू की गई यह योजना जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पहली बार लागू होगी।
विश्वास-2026 योजना के तहत लंबित मामलों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें न्यायालयों में विचाराधीन मामले, धारा 14बी के अंतिम आदेश वाले मामले (आरआरसी सहित), नोटिस जारी होने वाले निर्णय पूर्व और ऐसे मामले जिनमें अभी नोटिस जारी नहीं हुआ है। इन सभी पर योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विचार होगा।
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इसका लाभ लेने के लिए नियोक्ताओं को पहले धारा 7क्यू के तहत पूरी बकाया ब्याज राशि जमा करनी होगी। साथ में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निस्तारण के बाद किसी न्यायिक या अर्धन्यायिक स्तर पर अपील नहीं की जाएगी। धोखाधड़ी, गबन, रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर, विवादित ब्याज का भुगतान नहीं करने वाले तथा जिन मामलों में हर्जाना पहले ही पूरी तरह वसूल किया जा चुका है उन्हें योजना से बाहर रखा गया है।
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नियोक्ताओं की सुविधा के लिए ईपीएफओ जम्मू कार्यालय पर हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। स्पष्ट किया गया है कि सभी आवेदन ईपीएफओ एम्प्लायर पोर्टल पर डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) या ई-साइन के माध्यम से ऑनलाइन जमा होंगे।
जुर्माने की संशोधित दरें
- दो महीने से कम डिफॉल्ट : 0.25% प्रतिमाह
- दो से चार महीने से कम : 0.50% प्रतिमाह
- चार महीने या उससे अधिक : 1.00% प्रतिमाह
ईपीएफओ जम्मू के क्षेत्रीय आयुक्त सुमित सिंह ने कहा कि योजना का उद्देश्य लंबित विवादों का पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान करना है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा। स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा। नियोक्ताओं और ईपीएफओ के बीच विश्वास मजबूत होगा। नियोक्ताओं से अनुरोध है कि वह इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।
-सुमित सिंह, क्षेत्रीय आयुक्त ईपीएफओ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख