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आतंकियों ने बदला रूट: सेना की मजबूत घेराबंदी से घाटी नहीं पहुंच पा रहे आतंकी, किश्तवाड़ में बना रहे डेरा

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 21 Jan 2026 11:53 AM IST
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सार

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों की मजबूत घेराबंदी के चलते आतंकी कश्मीर घाटी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किश्तवाड़ के जंगलों में वे डेरा डालकर मौके का इंतजार कर रहे हैं।

After the Pahalgam terror attack, security forces have laid a strong siege to eliminate the terrorists.
सुरक्षाबल। - फोटो : बसित जरगर
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खात्मे के लिए मजबूत घेराबंदी की है। ऑपरेशन महादेव के बाद आतंकी कश्मीर नहीं पहुंच पा रहे और वे किश्तवाड़ के जंगलों को डेरा बना रहे हैं। वे मौका मिलते ही कश्मीर घाटी में घुसने की कोशिश करेंगे।

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सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि आतंकी जम्मू संभाग की अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) और नियंत्रण रेखा (एलओसी) से घुसपैठ करते हैं। फिर कठुआ, बनी व बिलावर से होते हुए उधमपुर के डुडू, सियोज धार से भद्रवाह पहुंचते हैं। वहां से ठाठरी के दुर्गम क्षेत्रों और घने जंगलों से होते हुए किश्तवाड़ पहुंच जाते हैं। आगे पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों से होकर दक्षिण कश्मीर के रास्ते कश्मीर पहुंचने की कोशिश करते हैं।
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पहलगाम हमले के बाद विक्टर फोर्स ने सुरक्षा तंत्र मजबूत किया है। सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हैं। उनकी आतंकियों की मूवमेंट और ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क पर कड़ी नजर है। आतंकी किश्तवाड़ से आगे नहीं बढ़ पाने के कारण किश्तवाड़ को डेरा बनाने लगे हैं। 

आतंकी किश्तवाड़ में मजबूत कर रहे ओजीडब्ल्यू नेटवर्क
किश्तवाड़ के जंगलों में छिपे आतंकी और ओजीडब्ल्यू नेटवर्क का सामने आया है। ओजीडब्ल्यू से उन्हें पनाह व रसद मिल रही है। वे किश्तवाड़ के दुर्गम और घने जंगलों में भूमिगत ठिकाने बनाकर छिप रहे हैं। सोमवार को ही छात्रू के सिंहपोरा में आतंकी ठिकाना ध्वस्त किया गया है। पूर्व ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान ने कहा कि विक्टर फोर्स ने मजबूत किलाबंदी की है। आतंकी दक्षिण कश्मीर में घुसने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते वे किश्तवाड़ में रुकने के लिए मजबूर हैं। आतंकी लंबे समय तक लड़ने के इरादे से आए हैं और ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं।

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