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फैमिली कोर्ट में बच्चे की जज से गुहार: मां-बाप की लड़ाई और मुकदमा पसंद नहीं, मुझे तो रहना है दोनों के साथ

प्रवेश कुमारी, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 28 May 2026 06:21 AM IST
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सार

बच्चे ने जज के सामने कहा कि वह माता-पिता के बीच चल रहे मुकदमे से खुश नहीं है और दोनों के साथ रहना चाहता है। कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश अमित शर्मा ने बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए उसकी कस्टडी मां को सौंप दी।

child pleads in family court: I don't like my parents' fights and lawsuits, I want to live with both of them
demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फैमिली कोर्ट में नाबालिग बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामले में सात साल के बच्चे की भावुक बात ने अदालत का ध्यान खींच लिया। बच्चे ने जज के सामने कहा कि वह माता-पिता के बीच चल रहे मुकदमे से खुश नहीं है और दोनों के साथ रहना चाहता है। कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश अमित शर्मा ने बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए उसकी कस्टडी मां को सौंप दी। मामला अभिभावक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 के तहत दायर किया गया था।



मामले के अनुसार, जम्मू निवासी मां कनाडा में कार्यरत है। वह वहां की स्थायी नागरिक भी है। पिता मूल रूप से पंजाब के हैं और पुणे के बैंक में कार्यरत हैं। दोनों ने 2015 में प्रेम विवाह किया। 2018 में बेटे का जन्म हुआ। कोविड काल में परिवार जम्मू में साथ रहा। 2022 में मां कनाडा लौट गई। बाद में पिता भी नौकरी के लिए पुणे चले गए।
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2023 में महिला के भारत लौटने के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि प्रतिवादी का अपनी सहकर्मी के साथ विवाहेतर संबंध था। लंबे कार्य घंटों के कारण बच्चा अधिकतर समय नौकरानी के साथ घर में अकेला रहता है। महिला ने अदालत में कहा कि वह बच्चे को बेहतर शिक्षा, सुविधाएं और व्यक्तिगत देखभाल दे सकती है। वहीं, प्रतिवादी के वकील ने इसका विरोध किया। दलील दी कि मां बच्चे को विदेश ले जाकर पिता-पुत्र के रिश्ते को कमजोर करना चाहती है। साथ ही बच्चे के लिए विदेशी संस्कृति, भाषा और मौसम जैसी चुनौतियों का भी हवाला दिया गया। पहले कोर्ट ने आपसी सहमति से मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने चैंबर में करीब 20 मिनट तक बच्चे से अकेले बातचीत की। बच्चे ने साफ कहा कि वह माता-पिता के झगड़ों और मुकदमों से परेशान है। अदालत ने फैसले में कहा कि कस्टडी मामलों में बच्चे की पसंद और मानसिक भलाई सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। कोर्ट ने माना कि बच्चे को मां से अलग करना उचित नहीं होगा।

पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार भी किया सुनिश्चित
कोर्ट ने पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार भी सुनिश्चित किया है। अदालत ने यह भी कहा कि मां के कार्य घंटे सीमित हैं और उसे घर से काम करने की सुविधा प्राप्त है, जिससे वह बच्चे की बेहतर देखभाल कर सकेगी। कोर्ट ने माना कि कम उम्र होने के कारण बच्चा नए माहौल में आसानी से खुद को ढाल सकता है।

बच्चे के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए मां-बाप दोनों जरूरी
बच्चे के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए मां और पिता दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि साथ रहना संभव न हो, तो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां बच्चा अधिक सुरक्षित, खुश और संतुष्ट महसूस करे।
-प्रो. (सेवानिवृत्त) आरती बख्शी, मनोवैज्ञानिक

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