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Jammu News: सिंचाई नहर व नाले पर कब्जे से जुड़े कनाचक क्रॉस एफआईआर मामले में चार्जशीट पर रोक
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तहसीलदार से जुड़े मामले में एक ही जांच अधिकारी को दोनों केस की जांच के आदेश
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सिंचाई नहर/नाले पर कब्जे से जुड़े कनाचक क्रॉस एफआईआर विवाद में चार्जशीट पर रोक लगा दी है। कहा कि अगर बाद वाली एफआईआर की जांच के बाद चार्जशीट तैयार होती है तो उसे अगली सुनवाई तक संबंधित कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा। संबंधित एसएचओ को घटना से जुड़ी दोनों एफआईआर की जांच एक ही जांच अधिकारी को सौंपने के आदेश दिए।
प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश जारी किए। सुमित सिंह और अन्य बनाम जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश तथा अन्य मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमए चौधरी ने ये अंतरिम निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ताओं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)-2023 की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर स्पेशल म्युनिसिपल मोबाइल मजिस्ट्रेट, जम्मू के बीती 28 मार्च के आदेश और कनाचक पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
इस मामले में सुमित सिंह, मंजीत सिंह और मेनू याचिकाकर्ता हैं। पुलिस स्टेटस रिपोर्ट समेत याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों में आरोप दर्ज है कि मंजीत सिंह ने राजस्व विभाग में काम करने का दावा करते हुए अपना काफी प्रभाव होने की बात कही थी। हालांकि, कोर्ट के अपलोड किए गए दस्तावेजों में उनके पद का स्पष्ट रूप से तहसीलदार के तौर पर उल्लेख नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने बीती पांच अप्रैल को दर्ज एफआईआर को झूठी, परेशान करने वाली और जवाबी कार्रवाई के तौर पर दर्ज की गई बताया। जेएनएफ
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यह है पूरा मामला...
विवाद की शुरुआत छाता गुज्जरन इलाके में सिंचाई नहर/नाले पर कथित कब्जे को लेकर हुई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि गांव के लोगों ने पहले जम्मू के सिंचाई विभाग नंबर एक के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को एक अर्जी दी थी जिसमें सिंचाई नहर से कब्जा हटाने और पानी का बहाव बहाल करने की मांग की गई थी। कोर्ट रिकॉर्ड में यह याचिका मार्च, 2025 की है। याचिकाकर्ताओं के बयान के अनुसार इसके बाद बीते साल छह दिसंबर को झगड़ा हुआ, जिसके बाद याचिकाकर्ता मंजीत सिंह कनाचक पुलिस स्टेशन गए और दूसरी पक्ष के खिलाफ एफआईआर कराई। छह दिसंबर को लगभग उसी समय हुई घटना के संबंध में एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी थी और दूसरी पार्टी की शिकायतकर्ता और उनके परिवार के सदस्य उस पहले मामले में आरोपी थे। जम्मू के स्पेशल म्युनिसिपल मोबाइल मजिस्ट्रेट ने बीती 28 मार्च को एक आदेश कर कनाचक पुलिस स्टेशन के एसएचओ को दूसरी पार्टी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सिंचाई नहर/नाले पर कब्जे से जुड़े कनाचक क्रॉस एफआईआर विवाद में चार्जशीट पर रोक लगा दी है। कहा कि अगर बाद वाली एफआईआर की जांच के बाद चार्जशीट तैयार होती है तो उसे अगली सुनवाई तक संबंधित कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा। संबंधित एसएचओ को घटना से जुड़ी दोनों एफआईआर की जांच एक ही जांच अधिकारी को सौंपने के आदेश दिए।
प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश जारी किए। सुमित सिंह और अन्य बनाम जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश तथा अन्य मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमए चौधरी ने ये अंतरिम निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ताओं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)-2023 की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर स्पेशल म्युनिसिपल मोबाइल मजिस्ट्रेट, जम्मू के बीती 28 मार्च के आदेश और कनाचक पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
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इस मामले में सुमित सिंह, मंजीत सिंह और मेनू याचिकाकर्ता हैं। पुलिस स्टेटस रिपोर्ट समेत याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों में आरोप दर्ज है कि मंजीत सिंह ने राजस्व विभाग में काम करने का दावा करते हुए अपना काफी प्रभाव होने की बात कही थी। हालांकि, कोर्ट के अपलोड किए गए दस्तावेजों में उनके पद का स्पष्ट रूप से तहसीलदार के तौर पर उल्लेख नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने बीती पांच अप्रैल को दर्ज एफआईआर को झूठी, परेशान करने वाली और जवाबी कार्रवाई के तौर पर दर्ज की गई बताया। जेएनएफ
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यह है पूरा मामला...
विवाद की शुरुआत छाता गुज्जरन इलाके में सिंचाई नहर/नाले पर कथित कब्जे को लेकर हुई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि गांव के लोगों ने पहले जम्मू के सिंचाई विभाग नंबर एक के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को एक अर्जी दी थी जिसमें सिंचाई नहर से कब्जा हटाने और पानी का बहाव बहाल करने की मांग की गई थी। कोर्ट रिकॉर्ड में यह याचिका मार्च, 2025 की है। याचिकाकर्ताओं के बयान के अनुसार इसके बाद बीते साल छह दिसंबर को झगड़ा हुआ, जिसके बाद याचिकाकर्ता मंजीत सिंह कनाचक पुलिस स्टेशन गए और दूसरी पक्ष के खिलाफ एफआईआर कराई। छह दिसंबर को लगभग उसी समय हुई घटना के संबंध में एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी थी और दूसरी पार्टी की शिकायतकर्ता और उनके परिवार के सदस्य उस पहले मामले में आरोपी थे। जम्मू के स्पेशल म्युनिसिपल मोबाइल मजिस्ट्रेट ने बीती 28 मार्च को एक आदेश कर कनाचक पुलिस स्टेशन के एसएचओ को दूसरी पार्टी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।