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Jammu News: हथियार कंपनी के मालिक को एक साल की जेल
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- 171 डबल बैरल बंदूकें कानपुर भेजने के लिए इस्तेमाल किया था जाली परमिट
- धोखाधड़ी के आरोप से बरी लेकिन फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया
जम्मू। जम्मू की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने फर्जी परिवहन परमिट से 171 डबल बैरल बंदूकें कानपुर भेजने के मामले में हिमालय आर्म्स कंपनी के मालिक विनय कुमार वर्मा को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश मन्हास ने वर्मा को फर्जी दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया। हालांकि अदालत ने उसे धोखाधड़ी के आरोप से बरी कर दिया।
मामला मई 2011 का है। आरोप है कि हिमालय आर्म्स कंपनी ने 171 डबल बैरल बंदूकें परीक्षण के लिए कानपुर स्थित स्मॉल आर्म्स क्वालिटी एश्योरेंस एस्टेब्लिशमेंट भेजने में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, जम्मू के नाम से जारी फर्जी परिवहन परमिट का इस्तेमाल किया। मामले का खुलासा तब हुआ, जब कानपुर से परीक्षण शुल्क के रूप में 1.88 लाख रुपये जमा कराने संबंधी पत्र जम्मू प्रशासन को मिला। जांच में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने पुष्टि की कि संबंधित परिवहन परमिट कभी जारी ही नहीं किया गया था।
सीबीआई की जांच के दौरान फोरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि परमिट पर तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के कथित हस्ताक्षर और सरकारी मुहर फर्जी थे। वही दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर विनय कुमार वर्मा के होने की पुष्टि हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि कंपनी का तत्कालीन प्रबंधक हथियार और परमिट लेकर कानपुर गया था लेकिन वह कंपनी मालिक के निर्देश पर काम कर रहा था।
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अदालत ने कहा कि फर्जी परमिट का सीधा लाभ कंपनी के मालिक को मिला। साथ ही आरोपी यह भी नहीं बता सका कि उसके पास यह परमिट कैसे आया और न ही इसके वैध तरीके से जारी होने का कोई रिकॉर्ड पेश कर पाया। जेएनएफ
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- धोखाधड़ी के आरोप से बरी लेकिन फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया
जम्मू। जम्मू की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने फर्जी परिवहन परमिट से 171 डबल बैरल बंदूकें कानपुर भेजने के मामले में हिमालय आर्म्स कंपनी के मालिक विनय कुमार वर्मा को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश मन्हास ने वर्मा को फर्जी दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया। हालांकि अदालत ने उसे धोखाधड़ी के आरोप से बरी कर दिया।
मामला मई 2011 का है। आरोप है कि हिमालय आर्म्स कंपनी ने 171 डबल बैरल बंदूकें परीक्षण के लिए कानपुर स्थित स्मॉल आर्म्स क्वालिटी एश्योरेंस एस्टेब्लिशमेंट भेजने में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, जम्मू के नाम से जारी फर्जी परिवहन परमिट का इस्तेमाल किया। मामले का खुलासा तब हुआ, जब कानपुर से परीक्षण शुल्क के रूप में 1.88 लाख रुपये जमा कराने संबंधी पत्र जम्मू प्रशासन को मिला। जांच में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने पुष्टि की कि संबंधित परिवहन परमिट कभी जारी ही नहीं किया गया था।
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सीबीआई की जांच के दौरान फोरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि परमिट पर तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के कथित हस्ताक्षर और सरकारी मुहर फर्जी थे। वही दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर विनय कुमार वर्मा के होने की पुष्टि हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि कंपनी का तत्कालीन प्रबंधक हथियार और परमिट लेकर कानपुर गया था लेकिन वह कंपनी मालिक के निर्देश पर काम कर रहा था।
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अदालत ने कहा कि फर्जी परमिट का सीधा लाभ कंपनी के मालिक को मिला। साथ ही आरोपी यह भी नहीं बता सका कि उसके पास यह परमिट कैसे आया और न ही इसके वैध तरीके से जारी होने का कोई रिकॉर्ड पेश कर पाया। जेएनएफ