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Jammu News: जमीन विवाद में दुकानों पर निर्माण की अनुमति पर रोक
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अदालत ने यथास्थिति बरकरार रखने के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के रेहियां गांव में जमीन और दुकानों को लेकर चल रहे विवाद में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सांबा की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के आठ जनवरी 2026 के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें प्रतिवादियों को दुकानों पर निर्माण करने से नहीं रोका गया था। कोर्ट ने माना कि यह आदेश मूल निर्देशों में बदलाव के समान है और इससे वादी के अधिकार प्रभावित हो रहे थे।
मामला अश्विनी कुमार सिंह बनाम तारा सिंह व अन्य से जुड़ा है। इससे पहले मुंसिफ कोर्ट सांबा ने 20 दिसंबर, 2025 को दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। साथ ही प्रतिवादियों को दुकानों को बेचने या किसी तीसरे पक्ष को देने से भी रोक दिया गया था। बाद में आठ जनवरी को आदेश के क्रियान्वयन के दौरान प्रतिवादी की ओर से निर्माण की बात सामने आई। इसी को चुनौती देते हुए वादी ने अदालत में अपील दायर की।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की कोर्ट ने साफ कहा कि 20 दिसंबर के मूल आदेश में कहीं भी निर्माण की अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में स्पष्टीकरण के नाम पर निर्माण की छूट देना गलत है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि पहले ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत लंबित आवेदन जिसमें अदालत के अधिकार क्षेत्र और मुकदमे के मूल्यांकन से जुड़ा मामला है का निपटारा किया जाए। हालांकि अदालत ने 20 दिसंबर 2025 का यथास्थिति वाला आदेश बरकरार रखा है। अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामला अनुपालन के लिए निचली अदालत को भेज दिया गया है।
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सांबा। जिले के रेहियां गांव में जमीन और दुकानों को लेकर चल रहे विवाद में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सांबा की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के आठ जनवरी 2026 के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें प्रतिवादियों को दुकानों पर निर्माण करने से नहीं रोका गया था। कोर्ट ने माना कि यह आदेश मूल निर्देशों में बदलाव के समान है और इससे वादी के अधिकार प्रभावित हो रहे थे।
मामला अश्विनी कुमार सिंह बनाम तारा सिंह व अन्य से जुड़ा है। इससे पहले मुंसिफ कोर्ट सांबा ने 20 दिसंबर, 2025 को दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। साथ ही प्रतिवादियों को दुकानों को बेचने या किसी तीसरे पक्ष को देने से भी रोक दिया गया था। बाद में आठ जनवरी को आदेश के क्रियान्वयन के दौरान प्रतिवादी की ओर से निर्माण की बात सामने आई। इसी को चुनौती देते हुए वादी ने अदालत में अपील दायर की।
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की कोर्ट ने साफ कहा कि 20 दिसंबर के मूल आदेश में कहीं भी निर्माण की अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में स्पष्टीकरण के नाम पर निर्माण की छूट देना गलत है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि पहले ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत लंबित आवेदन जिसमें अदालत के अधिकार क्षेत्र और मुकदमे के मूल्यांकन से जुड़ा मामला है का निपटारा किया जाए। हालांकि अदालत ने 20 दिसंबर 2025 का यथास्थिति वाला आदेश बरकरार रखा है। अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामला अनुपालन के लिए निचली अदालत को भेज दिया गया है।
