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Jammu News: साक्ष्यों के अभाव में 17 साल पुराने फायरिंग के मामले में दो आरोपी बरी
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गवाहों के विरोधाभासी बयान और कमजोर जांच बनी वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सत्र न्यायालय सांबा ने 17 साल पुराने फायरिंग के मामले में आरोपी अनिल सिंह निवासी गढ़ मंडी और विश्वप्रताप सिंह निवासी पृथीपुर को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया है।
10 अप्रैल 2009 को विजयपुर क्षेत्र में कपिल शर्मा पर फायरिंग हुई थी। घटना के समय वह मिल के पास मौजूद था। उसे घायल अवस्था में पहले विजयपुर अस्पताल और फिर जीएमसी जम्मू रेफर किया गया था। अभियोजन ने इस घटना के पीछे जमीन विवाद को कारण बताया था। जांच में नानक चंद, गिरधारी लाल और दीपक शर्मा समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए लेकिन साक्ष्य के अभाव में कुछ आरोपियों को पहले ही बरी कर दिया गया था। ट्रायल मुख्य रूप से अनिल सिंह और विश्व प्रताप सिंह के खिलाफ चला। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और कई गवाह अपने पूर्व के बयानों से मुकर गए हैं। कुछ गवाह आरोपियों की पहचान भी स्पष्ट रूप से नहीं कर सके। मामले में टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हो गया।
अदालत ने यह भी कहा कि कथित हथियार की बरामदगी और उसके इस्तेमाल को साबित नहीं किया जा सका। जांच में कई विरोधाभास पाए गए और गवाहों के बयान भरोसे के योग्य नहीं थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी होते हैं। केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सत्र न्यायालय सांबा ने 17 साल पुराने फायरिंग के मामले में आरोपी अनिल सिंह निवासी गढ़ मंडी और विश्वप्रताप सिंह निवासी पृथीपुर को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया है।
10 अप्रैल 2009 को विजयपुर क्षेत्र में कपिल शर्मा पर फायरिंग हुई थी। घटना के समय वह मिल के पास मौजूद था। उसे घायल अवस्था में पहले विजयपुर अस्पताल और फिर जीएमसी जम्मू रेफर किया गया था। अभियोजन ने इस घटना के पीछे जमीन विवाद को कारण बताया था। जांच में नानक चंद, गिरधारी लाल और दीपक शर्मा समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए लेकिन साक्ष्य के अभाव में कुछ आरोपियों को पहले ही बरी कर दिया गया था। ट्रायल मुख्य रूप से अनिल सिंह और विश्व प्रताप सिंह के खिलाफ चला। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और कई गवाह अपने पूर्व के बयानों से मुकर गए हैं। कुछ गवाह आरोपियों की पहचान भी स्पष्ट रूप से नहीं कर सके। मामले में टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हो गया।
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अदालत ने यह भी कहा कि कथित हथियार की बरामदगी और उसके इस्तेमाल को साबित नहीं किया जा सका। जांच में कई विरोधाभास पाए गए और गवाहों के बयान भरोसे के योग्य नहीं थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी होते हैं। केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है।
