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जम्मू-कश्मीरः यासीन मलिक को लगा तगड़ा झटका, जेकेएलएफ पर लगा बैन रहेगा बरकरार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 26 Sep 2019 12:05 PM IST
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Credible material grounds to declare Yasin Malik's JKLF Y unlawful association said Tribunal
यासीन मलिक
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कश्मीरी अलगाववादी संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक को करारा झटका लगा है। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम ट्रिब्यूनल ने जेकेएलएफ-वाई पर लगे बैन को बरकरार रखा है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि जेकेएलएफ-वाई को गैरकानूनी संगठन करार देने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। साथ ही कहा कि जेकेएलएफ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार के पास विश्वसनीय आधार मौजूद हैं।

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बता दें कि जेकेएलएफ के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। साथ ही आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप भी लगता रहा है। 1990 में वायुसेना के पांच जवानों की श्रीनगर में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इस केस में अलगाववादी नेता यासीन मलिक का भी नाम शामिल है और वह जेल में है। यह मामला जम्मू के टाडा कोर्ट में है। यासीन मलिक को कुछ महीने पहले ही पकड़ा गया था। वह 1990 के बाद से ही जमानत पर था। यासीन को एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले में भी पकड़ा था।

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यासीन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया जाएगा। 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर शहर में यह वारदात हुई थी। 1989 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण मामले में भी यासीन का नाम शामिल है। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।


सीबीआई की ओर से 1990 में ही दो मामलों का चालान पेश किया जा चुका है। 1995 में यासीन ने इस मामले की सुनवाई पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। 2008 में यासीन ने इस मामले की सुनवाई को जम्मू से श्रीनगर शिफ्ट करने की याचिका भी दायर की थी। लेकिन अप्रैल 2019 में सीबीआई ने यासिन की इस याचिका को चुनौती दी और कोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया।


पुलवामा हमले के 8 दिन बाद 22 फरवरी को यासीन मलिक को गिरफ्तार किया था। इसी साल मार्च में केंद्र सरकार ने जेकेएलएफ को आतंक विरोधी कानून (UAPA) के तहत बैन कर दिया था।

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