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Jammu News: लापरवाही से मौत के मामले में सबूतों के अभाव में आरोपी बरी
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सांबा। नौ साल पुराने सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
मामला 22 सितंबर 2017 का है, जब बाड़ी ब्राह्मणा थाना क्षेत्र के पटली मोड़ के पास एक बस ने सड़क किनारे खड़े सुरजीत कुमार को टक्कर मार दी थी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना में पुलिस ने बस चालक अश्वनी कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 10 में से केवल 3 गवाह ही पेश किए। इनमें से एक गवाह ने खुद घटना को नहीं देखा, जबकि दूसरे मुख्य गवाह ने भी बस का नंबर स्वयं नहीं देखा और न ही अदालत में आरोपी की स्पष्ट पहचान कर पाया। तीसरे गवाह की जिरह पूरी नहीं हो सकी। इससे उसका बयान भी साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं माना गया।
अदालत ने यह भी पाया कि जांच अधिकारी और डॉक्टर जैसे महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं किया गया। इससे केस में गंभीर खामियां रह गईं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है। इस मामले में ऐसा नहीं हो सका। साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी अश्वनी कुमार को बरी करते हुए जमानत बांड भी समाप्त कर दिए और मामले को बंद कर दिया।
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मामला 22 सितंबर 2017 का है, जब बाड़ी ब्राह्मणा थाना क्षेत्र के पटली मोड़ के पास एक बस ने सड़क किनारे खड़े सुरजीत कुमार को टक्कर मार दी थी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना में पुलिस ने बस चालक अश्वनी कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 10 में से केवल 3 गवाह ही पेश किए। इनमें से एक गवाह ने खुद घटना को नहीं देखा, जबकि दूसरे मुख्य गवाह ने भी बस का नंबर स्वयं नहीं देखा और न ही अदालत में आरोपी की स्पष्ट पहचान कर पाया। तीसरे गवाह की जिरह पूरी नहीं हो सकी। इससे उसका बयान भी साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं माना गया।
अदालत ने यह भी पाया कि जांच अधिकारी और डॉक्टर जैसे महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं किया गया। इससे केस में गंभीर खामियां रह गईं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है। इस मामले में ऐसा नहीं हो सका। साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी अश्वनी कुमार को बरी करते हुए जमानत बांड भी समाप्त कर दिए और मामले को बंद कर दिया।

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