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Jammu News: 'रुत्त-राड़े' में झलकी डोगरा संस्कृति विरासत को सहेजने का लिया संकल्प
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कलाकारों ने कविता, लोक संगीत और पारंपरिक कला से मोहा मन
उत्सव में बड़ी संख्या में पहुंचे साहित्यकार और स्थानीय लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी और डोगरी साहित्य सभा कुप्पड़ प्रगलता के सहयोग से माहभर चले डोगरा लोक उत्सव ''रुत्त-राड़े'' का वीरवार को भव्य समापन समारोह हुआ। कार्यक्रम में डोगरा समुदाय की विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डोगरी कवि सम्मेलन से हुई। इसमें रणधीर सिंह रायपुरिया, संसार चंद कलोत्रा, राकेश वर्मा, जगदीश सिंह, अमित सिंह सलाथिया, रामपाल शर्मा, गंधर्व सिंह, नेहा शर्मा, रजनी थापा, अब्दुल कादिर कुंदरिया और राजेंद्र सिंह सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। लोक संगीत मंडलियों ने रुत्त-राड़े से जुड़े पारंपरिक गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। महिला कलाकारों ने रंग-बिरंगे पारंपरिक चित्रों और लोक आकृतियों से ''राड़े'' को सजाकर डोगरा महिलाओं की पारंपरिक कला और सृजनात्मकता का जीवंत प्रदर्शन किया। समापन समारोह में विधायक युधवीर सेठी मुख्य अतिथि रहे। डोगरी साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लोक कलाकार और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
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अकादमी ने क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई। इसे साहित्य प्रेमियों और आगंतुकों ने खूब सराहा। अधिकारियों ने कहा कि डोगरी साहित्य सभा के सहयोग से हर वर्ष आयोजित किया जाने वाला यह उत्सव डोगरा संस्कृति की विलुप्त होती परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। समापन पर डोगरा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम की प्रभारी एवं अकादमी की डोगरी संपादक रीता खज्याल भी उपस्थित रहीं।
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उत्सव में बड़ी संख्या में पहुंचे साहित्यकार और स्थानीय लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी और डोगरी साहित्य सभा कुप्पड़ प्रगलता के सहयोग से माहभर चले डोगरा लोक उत्सव ''रुत्त-राड़े'' का वीरवार को भव्य समापन समारोह हुआ। कार्यक्रम में डोगरा समुदाय की विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डोगरी कवि सम्मेलन से हुई। इसमें रणधीर सिंह रायपुरिया, संसार चंद कलोत्रा, राकेश वर्मा, जगदीश सिंह, अमित सिंह सलाथिया, रामपाल शर्मा, गंधर्व सिंह, नेहा शर्मा, रजनी थापा, अब्दुल कादिर कुंदरिया और राजेंद्र सिंह सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। लोक संगीत मंडलियों ने रुत्त-राड़े से जुड़े पारंपरिक गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। महिला कलाकारों ने रंग-बिरंगे पारंपरिक चित्रों और लोक आकृतियों से ''राड़े'' को सजाकर डोगरा महिलाओं की पारंपरिक कला और सृजनात्मकता का जीवंत प्रदर्शन किया। समापन समारोह में विधायक युधवीर सेठी मुख्य अतिथि रहे। डोगरी साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लोक कलाकार और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
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अकादमी ने क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई। इसे साहित्य प्रेमियों और आगंतुकों ने खूब सराहा। अधिकारियों ने कहा कि डोगरी साहित्य सभा के सहयोग से हर वर्ष आयोजित किया जाने वाला यह उत्सव डोगरा संस्कृति की विलुप्त होती परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। समापन पर डोगरा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम की प्रभारी एवं अकादमी की डोगरी संपादक रीता खज्याल भी उपस्थित रहीं।
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