जम्मू: 'नियमित करो या कुर्सी छोड़ो', दरबार मूव के पहले दिन ही उमर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे कर्मचारी
दरबार मूव के बाद जम्मू में सरकारी कार्यालय खुलने के पहले दिन सैकड़ों दैनिक वेतनभोगियों और आशा वर्कर्स ने सेवाएं नियमित करने और न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
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दरबार मूव के बाद सोमवार को सरकारी कार्यालय खुलने के पहले ही दिन जम्मू में सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और आशा वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। ऑल जम्मू-कश्मीर डेली वेजर्स संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकालकर सेवाएं नियमित करने और न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारी सिविल सचिवालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने एमएलए हॉस्टल के पास बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिस पर पुलिसकर्मियों के साथ उनकी धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद संगठन के अध्यक्ष सनी कांत चिब को हिरासत में ले लिया गया।
संगठन के अध्यक्ष सनी कांत चिब ने कहा कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले दो वर्षों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को उनके नियमितीकरण के वादे की याद दिलाते हुए कहा कि सरकार को दैनिक वेतनभोगियों की सेवाएं नियमित करने और न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने का आदेश जारी करना चाहिए।
चिब ने कहा कि सरकार गरीब और जरूरतमंद कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और केवल राजनीति में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी जनता के वोटों की बदौलत मिली है, इसलिए सरकार को गरीबों के साथ न्याय करना चाहिए।
संगठन ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियमितीकरण का आदेश जारी करने और न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने की मांग दोहराई।