Ground Report: इमरजेंसी में इलाज से पहले पर्ची की दौड़, दिल्ली के अस्पतालों में फर्श पर पानी और जमीन पर मरीज
लेडी हार्डिंग और आरएमएल में इमरजेंसी में पहुंचने वाले रेड जोन के मरीजों को इलाज से पहले की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए करनी पड़ती है मशक्कत।
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विस्तार
कॉमेडी फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ में सरकारी अस्पतालों की इलाज से पहले की औपचारिकताओं पर तीखा व्यंग्य किया गया है। घायल मरीज के नाम दर्ज कराने, पर्ची बनवाने और डॉक्टर तक पहुंचने के इंतजार का दृश्य व्यवस्था की खामियों और आम आदमी की परेशानी उजागर करता है। फिल्म में मुन्ना नियमों को दरकिनार कर इलाज करा लेता है, लेकिन दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के पास ऐसा कोई ‘मुन्ना’ नहीं है। दोनों अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों की दिक्कतों को सामने लाती अमर उजाला संवाददाता- सिमरन, नितिन राजपूत और संवाद न्यूज एजेंसी के सचिन कुमार की पेश है रिपोर्ट...
लेडी हार्डिंग : पर्ची के लिए दौड़, फर्श पर पानी और बदबू
रात 10:00 बजे से 1:00 बजे तक
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के रेड जोन में मरीजों की भीड़ रही। कोई बेसुध था तो कोई लहूलुहान हालत में अपनों के साथ पहुंचा। गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा की जरूरत थी, लेकिन इलाज से पहले पर्ची बनवाने की प्रक्रिया कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी। समय बीतने के साथ कुछ मरीजों की हालत बिगड़ती दिखी। इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती रही। इस बीच अस्पताल की नागरिक सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं दिखी। फर्श पर पानी फैला था और टॉयलेट से आती बदबू परेशानी बढ़ा रही थी। इससे मरीजों के फिसलने का खतरा बना हुआ था। वाटर कूलर भी धूल से ढका नजर आया। अस्पताल का ओपीडी ढूंढना भी आसान नहीं था। अंग्रेजी में लिखे ‘ओपीडी’ के बोर्ड पर सिर्फ ‘पी’ की लाइट जल रही थी।
आरएमएल : बेड नहीं मिला, जमीन पर लेटे मरीज
रात 1:30 से 4:00 बजे तक
राम मनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भीड़ बनी रही। कई मरीजों को बेड नहीं मिल पाया। कुछ मरीज कैनुला लगी हालत में जमीन पर लेटे नजर आए। बेड की कमी के कारण तीमारदार परेशान रहे। रात दो बजे तो इमरजेंसी में वार्ड बॉय तलाशने पर भी नहीं मिल रहे थे। ऐसे में तीमारदारों को ही मरीजों की देखभाल करनी पड़ रही थी। कोई मरीज को सहारा देता दिखा तो कोई व्हीलचेयर खुद खींचता नजर आया। इमरजेंसी की छत से टपकता पानी भी परेशानी बढ़ा रहा था। पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी नजर नहीं आई। करीब तीन बजे न्यू वार्ड ब्लॉक की जर्जर इमारत में बड़ी संख्या में तीमारदार मौजूद थे। इसके करीब आधे घंटे बाद अस्पताल परिसर में बंदरों का झुंड दिखाई दिया। बंदरों से बचने के लिए तीमारदार अपने बैग और जरूरी सामान संभालकर वहां से हटते दिखे।
मरीज बोले...
रात में बेहतर इलाज की उम्मीद में आई
75 वर्षीय लखी बाई पिछले 20 से 25 दिनों से बीमारी से परेशान हैं। उनके दिमाग में खून का थक्का जमने की समस्या है और उम्र अधिक होने के कारण चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। रात में तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें मयूर विहार स्थित घर से लेडी हार्डिंग की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। लखी बाई ने बताया कि उनका इलाज चल रहा है, लेकिन अचानक परेशानी बढ़ने के कारण इमरजेंसी आना पड़ा।
इमरजेंसी में हमारी बात सुनने वाला कोई नहीं
46 वर्षीय नौशाद करीब सात महीने से हर्निया की समस्या से परेशान हैं। दर्द बढ़ने पर वह रात में आरएमएल अस्पताल पहुंचे। लंबे समय से इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे नौशाद व्यवस्था को लेकर भी परेशान दिखे। उनका कहना था कि इमरजेंसी में उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।
बीमारी पुरानी, उम्मीद है अच्छा इलाज मिलेगा
24 वर्षीय रजनीश बिहार से इलाज के लिए दिल्ली आए हैं। उन्हें जन्म से हृदय संबंधी बीमारी है। बचपन से दवाइयां और अस्पताल उनकी जिंदगी का हिस्सा रहे हैं। रात में तबीयत बिगड़ने पर परिवार उन्हें पहाड़गंज से लेडी हार्डिंग की इमरजेंसी लेकर पहुंचा। बीमारी पुरानी होने के बावजूद परिवार को बेहतर इलाज की उम्मीद है।
व्यवस्थाओं में लगातार किया जा रहा सुधार
मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है। गंभीर मरीजों के लिए पहले पंजीकरण जरूरी नहीं है। उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल आपातकालीन उपचार दिया जाता है। ट्रायज प्रक्रिया के तहत मरीजों को उनकी गंभीरता के अनुसार अलग-अलग जोन में रखा जाता है और जरूरत के मुताबिक इलाज या स्थानांतरण किया जाता है। रोजाना करीब चार हजार मरीज आते हैं। सफाई की नियमित निगरानी की जा रही है और गंदगी मिलने पर तुरंत सफाई कराई जाती है। चार गायनी वार्डों में अतिरिक्त पेयजल व्यवस्था की गई है। ओपीडी साइन बोर्ड की सेंसर संबंधी समस्या भी ठीक कराई जा रही है।
-डॉ. हिमानी अहलूवालिया, निदेशक, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
बेड की कमी नहीं, व्यवस्था लगातार बनाई जा रही बेहतर
आपातकालीन विभाग में मरीजों की सुविधा और उपचार व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। डायरेक्टर की टीम के साथ रोजाना बैठक होती है और आवश्यक बदलाव लागू किए जा रहे हैं। आपातकालीन विभाग में बेड की कमी नहीं है। मरीजों की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग जोन बनाए गए हैं और उनकी स्थिति के अनुरूप संबंधित जोन में उपचार दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर मरीज को संबंधित विभाग में भर्ती किया जाता है। अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग मरीजों की जरूरत के अनुसार किया जा रहा है। पानी टपकने की समस्या के समाधान के लिए सीपीडब्ल्यूडी के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि जल्द सुधार हो सके।
-डॉ. वैशाली भारद्वाज, जनसंपर्क अधिकारी, आरएमएल
मरीजों के काम की जरूरी जानकारियां
आरएमएल अस्पताल
- मरीज ओआरएस पोर्टल के माध्यम से घर बैठे ओपीडी की अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
- मोबाइल नंबर या आधार नंबर से पंजीकरण किया जा सकता है। ओटीपी के जरिए सत्यापन होता है।
- अस्पताल के ओपीडी पंजीकरण काउंटर पर भी पंजीकरण कराया जा सकता है।
लेडी हार्डिंग
- ओआरएस पोर्टल से घर बैठे अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
- मोबाइल नंबर, आभा आईडी या आधार के जरिये पंजीकरण की सुविधा है।
- अस्पताल के सामान्य ओपीडी काउंटर पर भी पंजीकरण कराया जा सकता है।
- ओपीडी में स्कैन एंड शेयर की सुविधा उपलब्ध है।
- शनिवार को पंजीकरण सुबह 8:30 से 11 बजे तक होता है।