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Jammu News: जम्मू में एचआईवी के मरीजों में सबसे ज्यादा टीबी का खतरा
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- जीएमसी जम्मू के अध्ययन में अवसरवादी संक्रमण से ग्रसित मिले सात फीसदी मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए सिर्फ वायरस ही नहीं, बल्कि कमजोर पड़ चुकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में टीबी सबसे बड़ा खतरा बन जाती है। जीएमसी जम्मू के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में किए गए अध्ययन में यही तस्वीर सामने आई है।
अध्ययन के अनुसार इलाज करा रहे एचआईवी मरीजों में सात फीसदी अवसरवादी संक्रमण से ग्रसित मिले। यह संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर तेजी से फैलता है। इनमें टीबी, फंगल संक्रमण और डायरिया जैसे रोग शामिल हैं। अध्ययन में मिले ऐसे संक्रमणों में लगभग हर दूसरा मामला टीबी का था।
अध्ययन डॉ. हीना नजीर, प्रो. राकेश बहल, डॉ. रश्मि कुमारी और डॉ. एसबा आई. लतीफ ने किया। शोधकर्ताओं के अनुसार एचआईवी मरीजों में बीमारी और मौत की बड़ी वजह अवसरवादी संक्रमण होते हैं। इसी कारण इनकी स्थिति और उनके प्रमुख प्रकारों का पता लगाने के लिए जीएमसी जम्मू के एआरटी सेंटर में अध्ययन किया गया।
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टीबी के बाद फंगल इंफेक्शन
और डायरिया भी बड़ी चिंता
केंद्र में आए 3,000 एचआईवी मरीजों में से 200 मरीजों में कुल 210 अवसरवादी संक्रमण मिले। संक्रमण के 84.5 फीसदी मामलों में विषमलैंगिक संबंध प्रमुख जोखिम कारक के रूप में सामने आए। अध्ययन में मिले 210 अवसरवादी संक्रमणों में 103 मामले टीबी के थे। इनमें 59 मरीज फेफड़ों की टीबी और 44 शरीर के अन्य अंगों की टीबी से पीड़ित थे। इसके बाद 52 मरीजों में फंगल संक्रमण (कैंडिडायसिस) और 24 मरीजों में डायरिया मिला। इसके अलावा निमोनिया, हर्पीज जोस्टर, क्रिप्टोकोकल मेनिन्जाइटिस, सीएमवी रेटिनाइटिस समेत अन्य संक्रमणों के 31 मामले भी मिले।
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समय पर जांच और इलाज जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि एचआईवी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर अवसरवादी संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं। अध्ययन में टीबी सबसे आम अवसरवादी संक्रमण पाया गया। शोधकर्ताओं ने ऐसे मरीजों की नियमित जांच, संक्रमण की जल्द पहचान और समय पर इलाज पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है ताकि गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सके।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए सिर्फ वायरस ही नहीं, बल्कि कमजोर पड़ चुकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में टीबी सबसे बड़ा खतरा बन जाती है। जीएमसी जम्मू के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में किए गए अध्ययन में यही तस्वीर सामने आई है।
अध्ययन के अनुसार इलाज करा रहे एचआईवी मरीजों में सात फीसदी अवसरवादी संक्रमण से ग्रसित मिले। यह संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर तेजी से फैलता है। इनमें टीबी, फंगल संक्रमण और डायरिया जैसे रोग शामिल हैं। अध्ययन में मिले ऐसे संक्रमणों में लगभग हर दूसरा मामला टीबी का था।
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अध्ययन डॉ. हीना नजीर, प्रो. राकेश बहल, डॉ. रश्मि कुमारी और डॉ. एसबा आई. लतीफ ने किया। शोधकर्ताओं के अनुसार एचआईवी मरीजों में बीमारी और मौत की बड़ी वजह अवसरवादी संक्रमण होते हैं। इसी कारण इनकी स्थिति और उनके प्रमुख प्रकारों का पता लगाने के लिए जीएमसी जम्मू के एआरटी सेंटर में अध्ययन किया गया।
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टीबी के बाद फंगल इंफेक्शन
और डायरिया भी बड़ी चिंता
केंद्र में आए 3,000 एचआईवी मरीजों में से 200 मरीजों में कुल 210 अवसरवादी संक्रमण मिले। संक्रमण के 84.5 फीसदी मामलों में विषमलैंगिक संबंध प्रमुख जोखिम कारक के रूप में सामने आए। अध्ययन में मिले 210 अवसरवादी संक्रमणों में 103 मामले टीबी के थे। इनमें 59 मरीज फेफड़ों की टीबी और 44 शरीर के अन्य अंगों की टीबी से पीड़ित थे। इसके बाद 52 मरीजों में फंगल संक्रमण (कैंडिडायसिस) और 24 मरीजों में डायरिया मिला। इसके अलावा निमोनिया, हर्पीज जोस्टर, क्रिप्टोकोकल मेनिन्जाइटिस, सीएमवी रेटिनाइटिस समेत अन्य संक्रमणों के 31 मामले भी मिले।
समय पर जांच और इलाज जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि एचआईवी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर अवसरवादी संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं। अध्ययन में टीबी सबसे आम अवसरवादी संक्रमण पाया गया। शोधकर्ताओं ने ऐसे मरीजों की नियमित जांच, संक्रमण की जल्द पहचान और समय पर इलाज पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है ताकि गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सके।