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Jammu News: नाम बदलकर जम्मू विवि में कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को हटाने पर हाईकोर्ट का रोक
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- एक ही जरूरत के लिए समान व्यवस्था में पुराने शिक्षकों को बदलने पर रोक
- अनुभवी शिक्षकों को पहले मौका लेकिन स्थायी बने रहने का अधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू यूनिवर्सिटी में कॉन्ट्रैक्ट और अकादमिक अरेंजमेंट के तहत नियुक्त शिक्षकों को लेकर स्पष्ट किया है कि यूनिवर्सिटी एक ही जरूरत को पूरा करने के लिए नाम बदलकर (नोमेनक्लेचर बदलकर) उसी तरह की व्यवस्था में पुराने शिक्षकों को बदलकर नई व्यवस्था नहीं कर सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कॉन्ट्रैक्ट या अकादमिक अरेंजमेंट पर की गई नियुक्तियों को हर शैक्षणिक सत्र में इसी तरह बदलना उचित नहीं है। कोर्ट के अनुसार, यदि यूनिवर्सिटी को अपने विभागों में शिक्षकों की जरूरत है और वह इस जरूरत को पूरा करने के लिए एडहॉक, कॉन्ट्रैक्ट या अकादमिक अरेंजमेंट के तहत नियुक्तियां करती है तो पहले उन शिक्षकों को अवसर दिया जाए, जिन्होंने पहले शैक्षणिक सत्रों में सेवाएं दी हैं और अनुभव हासिल किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे शिक्षक स्थायी पदों पर नियुक्त नहीं होते क्योंकि उन्हें किसी स्थायी रिक्त पद के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल पोजीशन के आधार पर लगाया जाता है। इसलिए उन्हें तब तक जारी रखने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, जब तक संबंधित पदों को नियमित चयन प्रक्रिया के जरिए नहीं भरा जाता। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी यदि जरूरत महसूस करे तो पार्ट-टाइम और गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं ले सकती है लेकिन इन्हें केवल विशेष विषय पढ़ाने या किसी खास विषय पर लेक्चर देने के लिए ही रखा जाएगा और इन्हें नियमित शिक्षकों के स्थान पर नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल उन्हीं विभागों पर लागू होंगे, जहां शिक्षकों की जरूरत बनी हुई है लेकिन नियमित भर्ती नहीं हो पाई है। जिन विभागों में ऐसी जरूरत समाप्त हो चुकी है, वहां कॉन्ट्रैक्ट या अकादमिक अरेंजमेंट पर नियुक्त शिक्षकों को अनुबंध अवधि से आगे जारी रखने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
लॉ विभाग में अस्थायी शिक्षकों की जरूरत के मामले में कोर्ट ने यह निर्णय संबंधित विभाग और बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर छोड़ दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में तीन और पांच वर्षीय लॉ कोर्स के लिए फैकल्टी की आवश्यकता का आकलन करे और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे। यह आदेश डॉ. सोम राज बनाम जम्मू यूनिवर्सिटी सहित संबंधित मामलों में दिया गया है। इसी से जुड़ी और याचिकाएं भी कोर्ट के पास थीं, जिन्हें एक साथ सुना गया। कोर्ट ने कहा कि इन सभी याचिकाओं में कोई अलग तथ्य नहीं है और इनका निपटारा सात नवंबर, 2025 को दिए गए फैसले यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर बनाम सबा मंजूर और अन्य के आधार पर किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू यूनिवर्सिटी में कॉन्ट्रैक्ट और अकादमिक अरेंजमेंट के तहत नियुक्त शिक्षकों को लेकर स्पष्ट किया है कि यूनिवर्सिटी एक ही जरूरत को पूरा करने के लिए नाम बदलकर (नोमेनक्लेचर बदलकर) उसी तरह की व्यवस्था में पुराने शिक्षकों को बदलकर नई व्यवस्था नहीं कर सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कॉन्ट्रैक्ट या अकादमिक अरेंजमेंट पर की गई नियुक्तियों को हर शैक्षणिक सत्र में इसी तरह बदलना उचित नहीं है। कोर्ट के अनुसार, यदि यूनिवर्सिटी को अपने विभागों में शिक्षकों की जरूरत है और वह इस जरूरत को पूरा करने के लिए एडहॉक, कॉन्ट्रैक्ट या अकादमिक अरेंजमेंट के तहत नियुक्तियां करती है तो पहले उन शिक्षकों को अवसर दिया जाए, जिन्होंने पहले शैक्षणिक सत्रों में सेवाएं दी हैं और अनुभव हासिल किया है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे शिक्षक स्थायी पदों पर नियुक्त नहीं होते क्योंकि उन्हें किसी स्थायी रिक्त पद के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल पोजीशन के आधार पर लगाया जाता है। इसलिए उन्हें तब तक जारी रखने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, जब तक संबंधित पदों को नियमित चयन प्रक्रिया के जरिए नहीं भरा जाता। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी यदि जरूरत महसूस करे तो पार्ट-टाइम और गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं ले सकती है लेकिन इन्हें केवल विशेष विषय पढ़ाने या किसी खास विषय पर लेक्चर देने के लिए ही रखा जाएगा और इन्हें नियमित शिक्षकों के स्थान पर नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल उन्हीं विभागों पर लागू होंगे, जहां शिक्षकों की जरूरत बनी हुई है लेकिन नियमित भर्ती नहीं हो पाई है। जिन विभागों में ऐसी जरूरत समाप्त हो चुकी है, वहां कॉन्ट्रैक्ट या अकादमिक अरेंजमेंट पर नियुक्त शिक्षकों को अनुबंध अवधि से आगे जारी रखने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
लॉ विभाग में अस्थायी शिक्षकों की जरूरत के मामले में कोर्ट ने यह निर्णय संबंधित विभाग और बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर छोड़ दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में तीन और पांच वर्षीय लॉ कोर्स के लिए फैकल्टी की आवश्यकता का आकलन करे और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे। यह आदेश डॉ. सोम राज बनाम जम्मू यूनिवर्सिटी सहित संबंधित मामलों में दिया गया है। इसी से जुड़ी और याचिकाएं भी कोर्ट के पास थीं, जिन्हें एक साथ सुना गया। कोर्ट ने कहा कि इन सभी याचिकाओं में कोई अलग तथ्य नहीं है और इनका निपटारा सात नवंबर, 2025 को दिए गए फैसले यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर बनाम सबा मंजूर और अन्य के आधार पर किया गया।
