{"_id":"6a8222577203ea36ce043b93","slug":"jammu-and-kashmir-news-reasi-news-c-10-1-agr1010-987696-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या हमें 1947 के दौर में धकेला जा रहा है : महबूबा मुफ्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्या हमें 1947 के दौर में धकेला जा रहा है : महबूबा मुफ्ती
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश को संविधान निर्माताओं के सपनों से दूर ले जाकर विभाजनकारी माहौल की तरफ धकेला जा रहा है।
महबूबा ने कहा कि आज की आजादी देश के करोड़ों लोगों के बलिदान के बाद नसीब हुई है। महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार बल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महान नेताओं ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां हर नागरिक को अपनी पसंद के कपड़े पहनने, खान-पान की स्वतंत्रता और सम्मान से जीने का अधिकार हो तथा सभी को बराबरी का इंसाफ मिले।
केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर और तत्कालीन नेतृत्व द्वारा दिए गए संविधान में धर्म या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की कोई जगह नहीं थी। आजादी के करीब 80 साल बाद ऐसा लगता है कि देश को पीछे 1947 के उस दौर की ओर ले जाया जा रहा है, जहां हिंदू-मुस्लिम टकराव, अधिकारों की कमी और तानाशाही थी। आरक्षण के सवाल पर महबूबा ने कहा कि इस पर वर्ष 2023 में ही कानून बन चुका है और सरकार को केवल इसे ईमानदारी से लागू करने की जरूरत है, इसमें विपक्ष को दोष देने का कोई औचित्य नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश को संविधान निर्माताओं के सपनों से दूर ले जाकर विभाजनकारी माहौल की तरफ धकेला जा रहा है।
महबूबा ने कहा कि आज की आजादी देश के करोड़ों लोगों के बलिदान के बाद नसीब हुई है। महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार बल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महान नेताओं ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां हर नागरिक को अपनी पसंद के कपड़े पहनने, खान-पान की स्वतंत्रता और सम्मान से जीने का अधिकार हो तथा सभी को बराबरी का इंसाफ मिले।
विज्ञापन
केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर और तत्कालीन नेतृत्व द्वारा दिए गए संविधान में धर्म या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की कोई जगह नहीं थी। आजादी के करीब 80 साल बाद ऐसा लगता है कि देश को पीछे 1947 के उस दौर की ओर ले जाया जा रहा है, जहां हिंदू-मुस्लिम टकराव, अधिकारों की कमी और तानाशाही थी। आरक्षण के सवाल पर महबूबा ने कहा कि इस पर वर्ष 2023 में ही कानून बन चुका है और सरकार को केवल इसे ईमानदारी से लागू करने की जरूरत है, इसमें विपक्ष को दोष देने का कोई औचित्य नहीं है।
विज्ञापन