J&K: गवर्नर ने निरस्त की रिलायंस के साथ ग्रुप मेडिक्लेम को लेकर की गई साझेदारी, मचा हड़कंप
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राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारियों के लिए रिलायंस के साथ की गई ग्रुप मेडिक्लेम हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की साझेदारी को राज्यपाल ने निरस्त कर दिया है। इसके बाद से नौकरशाही में हड़कंप है। जहां कर्मचारी अपना रिफंड मांग रहे हैं, वहीं कर्मचारी नेताओं का कहना है कि साझेदारी निरस्त होने में भी कोई खेल हो सकता है। वह पहले से ही इंश्योरेंस प्लान को महंगा बताते हुए इस डील को खारिज किए जाने की मांग कर रहे थे।
श्रीनगर में वीरवार को एक कार्यक्रम में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा भी कि उन्होंने जब फाइल देखी तो इसे निरस्त करने में एक मिनट नहीं लगाया। हालांकि उन्होंने इस मामले में किसी एक का नाम लेने से इन्कार किया। कहा-जो भी दोषी होंगे, उन्हें दंडित किया जाएगा।
उधर, जेएंडके सिविल सेक्रेटेरियएट एंप्लायज एसोसिएशन के पदाधिकारी गुलाम रसूल मीर ने इस मामले को उठाते हुए साझेदारी से हाथ पीछे खींचे जाने में भी धोखाधड़ी की आशंका जताई। साथ ही मांग की है कि सभी कर्मचारियों को उनकी भुगतान की किस्त की राशि रिफंड की जाए। बीते 20 सितंबर को सरकार की तरफ से यह कदम उठाए जाने के बाद से ही इस कदम को लेकर सरकार की किरकिरी हो रही थी। यह प्लान महंगा था, जिसे लेकर पहले दिन से ही कर्मचारी इस प्लान का विरोध कर रहे थे। उन्हें इस मामले में धोखाधड़ी की आशंका थी। यह प्लान क्यों लिया गया, इसकी जांच मुख्य सचिव को दी गई थी। उन्हीं की रिपोर्ट के बाद राज्यपाल ने इस साझेदारी को खारिज किया।
जांच बिठाएं, इस कांट्रेक्ट के पीछे कौन: उमर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से मुख्य सचिव की अगुवाई में जांच कराए जाने की बात कही है, ताकि यह सामने आ सके कि रिलायंस समूह को यह इंश्योरेंस कांट्रेक्ट दिए जाने के पीछे कौन है? उन्होंने कहा कि मामले में इतना पैसा इनवाल्व है कि यह गलती तो कम से कम नहीं हो सकती। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि केवल कांट्रेक्ट को खत्म किया जाने काफी नहीं है। पता चलना चाहिए कि अपराधी कौन है उसे सामने लाकर दंडित किया जाना चाहिए। बता दें कि एआईसीसी अध्यक्ष राहुल गांधी भी पहले ही अंबानी के पक्ष में फैसलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठा चुके हैं।
सोशल मीडिया पर छाया रहा मुद्दा
जम्मू-कश्मीर के राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए रिलायंस के साथ की गई इस ग्रुप मेडिक्लेम हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का मसला वीरवार को दिन भर सोशल मीडिया पर छाया रहा। खुद सरकारी कर्मचारियों ने जमकर इस फैसले की फजीहत की।