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Jammu News: चार दिन चलने के बाद बस सेवा बंद, आल्हा के लोगों में रोष
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अरनिया। ब्लाॅक के आदर्श गावं आल्हा में कोरोना काल से बंद बस सेवा शुरू तो हुई लेकिन चार दिन चलने के बाद फिर बंद हो गई। इससे लोग परेशान हैं। लोगों ने इस संबंध में विधायक राजीव भगत और यातायात विभाग को अवगत कराया है परंतु अभी तक समाधान नही हुआ है। विधायक डॉ. राजीव भगत ने एक महीना पहले क्षेत्र के लोगों को जेकेएसआरटीसी बस सेवा की सौगात दी थी।
सीमावर्ती गांव आल्हा से मौजूदा समय में कोई बस सेवा नहीं है। अरनिया से करियाल खुर्द होते हुए जम्मू के लिए सुबह एक बस रवाना होती है। शाम को वही बस वापस अरनिया पहुंचती है। वहीं एक बस सीमावर्ती गांव पिंडी चाड़कां कलां से जम्मू का रुख करती है परंतु आदर्श गांव में बस सेवा ठप पड़ी है।
गांव के पूर्व उप सरपंच लवली सिंह ने बताया कि रोजाना स्तर पर गांव से दर्जनों लोग शहर का रुख करते हैं। बस सेवा न होने से पैदल 2 किलोमीटर का सफर कर करियाल खुर्द गांव में बस स्टॉप तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को सशक्त और समृद्ध करने के सरकार के दावे जमीन स्तर पर खोखले हैं।
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ग्रामीण चंद्र मोहन ने बताया कि बस सेवा बंद होने से लोग एक बार फिर निजी वाहनों पर निर्भर हो गए हैं। आर्थिक खर्च बढ़ गया है। स्कूली छात्र, फैक्टरी वर्कर और मुलाजिम सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीण कुलदीप राज ने बताया कि बस सेवा बहाल होने से लोगों को यातायात में सहूलियत मिली थी। देर शाम तक शहर से लोग वापस गांव का रुख कर रहे थे। बस सेवा बंद होने से गांव के लोग एक बार फिर पिछड़ गए हैं।
ग्रामीण कमलेश कुमारी ने कहा कि निजी बस सेवा का कोई समय नही है। क्षमता से अधिक सवारियां भरी होती हैं। भीड़ से बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं का सफर प्रभावित हो रहा है। बस में महिलाओं को धक्का मुक्की तक सहन करनी पड़ती है। लिहाजा सरकारी बस सेवा को जल्द बहाल किया जाना चाहिए।
कोट
बिना किसी वजह बस सेवा बंद होने का जल्द पता लगाया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को मूल सुविधाएं मुहैया करना उनकी प्राथमिकता है।
-राजीव भगत, विधायक
सीमावर्ती गांव आल्हा से मौजूदा समय में कोई बस सेवा नहीं है। अरनिया से करियाल खुर्द होते हुए जम्मू के लिए सुबह एक बस रवाना होती है। शाम को वही बस वापस अरनिया पहुंचती है। वहीं एक बस सीमावर्ती गांव पिंडी चाड़कां कलां से जम्मू का रुख करती है परंतु आदर्श गांव में बस सेवा ठप पड़ी है।
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गांव के पूर्व उप सरपंच लवली सिंह ने बताया कि रोजाना स्तर पर गांव से दर्जनों लोग शहर का रुख करते हैं। बस सेवा न होने से पैदल 2 किलोमीटर का सफर कर करियाल खुर्द गांव में बस स्टॉप तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को सशक्त और समृद्ध करने के सरकार के दावे जमीन स्तर पर खोखले हैं।
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ग्रामीण कुलदीप राज ने बताया कि बस सेवा बहाल होने से लोगों को यातायात में सहूलियत मिली थी। देर शाम तक शहर से लोग वापस गांव का रुख कर रहे थे। बस सेवा बंद होने से गांव के लोग एक बार फिर पिछड़ गए हैं।
ग्रामीण कमलेश कुमारी ने कहा कि निजी बस सेवा का कोई समय नही है। क्षमता से अधिक सवारियां भरी होती हैं। भीड़ से बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं का सफर प्रभावित हो रहा है। बस में महिलाओं को धक्का मुक्की तक सहन करनी पड़ती है। लिहाजा सरकारी बस सेवा को जल्द बहाल किया जाना चाहिए।
कोट
बिना किसी वजह बस सेवा बंद होने का जल्द पता लगाया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को मूल सुविधाएं मुहैया करना उनकी प्राथमिकता है।
-राजीव भगत, विधायक