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Jammu News: पीड़िता के बयान से पलटने पर सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपी रिहा
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा अरविंद शर्मा की अदालत ने सांबा थाना अधिकार क्षेत्र के तहत दर्ज सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीनों आरोपियों मोहम्मद साहिल, दलवीर सिंह और वरुण चंदेल को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
मामला 30 अगस्त 2024 का है, जब पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे फोन कॉल कर सांबा बुलाया गया और निर्माणाधीन मकान में तीन युवकों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मेडिकल परीक्षण, बाइक की जब्ती, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पीड़िता के बयान दर्ज किए गए।
हालांकि सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने ही बयान से मुकर गई और उसने आरोपियों की पहचान से इनकार कर दिया। अदालत में उसने दावा किया कि उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ बल्कि एक बाइक सवार से दुर्घटना हुई थी। उसने यह भी कहा कि प्रारंभिक शिकायत पुलिस के कहने पर लिखवाई गई थी। पीड़िता का पति और एक अन्य गवाह भी पलट गए और अभियोजन का साथ नहीं दिया।
अदालत ने कहा कि जब मुख्य गवाह ही घटना और आरोपियों की भूमिका से इनकार कर रही है तो आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सामग्री शेष नहीं बचती। इसी आधार पर तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया और उन्हें तत्काल रिहा करने के आदेश दिए गए। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए चालान को खारिज कर रिकॉर्ड में दाखिल करने के निर्देश भी जारी किए।
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मामला 30 अगस्त 2024 का है, जब पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे फोन कॉल कर सांबा बुलाया गया और निर्माणाधीन मकान में तीन युवकों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मेडिकल परीक्षण, बाइक की जब्ती, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पीड़िता के बयान दर्ज किए गए।
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हालांकि सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने ही बयान से मुकर गई और उसने आरोपियों की पहचान से इनकार कर दिया। अदालत में उसने दावा किया कि उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ बल्कि एक बाइक सवार से दुर्घटना हुई थी। उसने यह भी कहा कि प्रारंभिक शिकायत पुलिस के कहने पर लिखवाई गई थी। पीड़िता का पति और एक अन्य गवाह भी पलट गए और अभियोजन का साथ नहीं दिया।
अदालत ने कहा कि जब मुख्य गवाह ही घटना और आरोपियों की भूमिका से इनकार कर रही है तो आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सामग्री शेष नहीं बचती। इसी आधार पर तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया और उन्हें तत्काल रिहा करने के आदेश दिए गए। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए चालान को खारिज कर रिकॉर्ड में दाखिल करने के निर्देश भी जारी किए।
