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Jammu News: केलिको प्रिंटिंग से बदल रही महिलाओं की तकदीर
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सांबा। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली सांबा की दर्जनों महिलाएं आज अपने हुनर से न सिर्फ पारंपरिक केलिको प्रिंटिंग कला को नया जीवन दे रही हैं, बल्कि स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल भी बन रही हैं। रंगों और लकड़ी के ब्लॉक की मदद से कपड़ों पर उभरते खूबसूरत डिजाइन इन महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलती सोच की कहानी बयां कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर महिलाएं समूह बनाकर सूट, दुपट्टे, कुशन कवर और अन्य कपड़ों पर केलिको प्रिंटिंग कर रही हैं। इन उत्पादों की बाजार में मांग भी धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे महिलाओं को नियमित आमदनी होने लगी है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि समाज में उनकी पहचान भी बन रही है।
इस कार्य से जुड़ी सुनीता देवी बताती हैं कि पहले वह सिर्फ घर के कामकाज तक ही सीमित थीं। हैंडलूम विभाग की ओर से जब इस काम की ट्रेनिंग मिली तो शुरुआत में थोड़ा डर लगा, लेकिन अब हम खुद डिजाइन बनाते हैं और अपने उत्पाद बेचते भी हैं। इससे हर महीने अच्छी आमदनी हो रही है और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
रीना देवी का कहना है कि केलिको प्रिंटिंग सीखने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। रीना बताती हैं कि पहले समय खाली चला जाता था, लेकिन अब हम कुछ नया सीख रहे हैं और उससे कमाई भी कर रहे हैं। हमारे बनाए डिजाइन लोगों को पसंद आ रहे हैं, इससे और मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है। (संवाद)
समूह में काम करने से मिलती है नई ताकत
पूजा देवी कहती हैं कि समूह में काम करने से महिलाओं को एक-दूसरे से सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे उत्पादों को बड़ा बाजार मिले और सरकार की ओर से और सहयोग मिले तो यह काम कई और महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महिलाओं की यह पहल न केवल रोजगार का माध्यम बन रही है, बल्कि पारंपरिक हस्तकला को भी नया जीवन दे रही है। मेहनत और लगन से काम कर रही ये महिलाएं अब दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। सांबा की इन महिलाओं के हाथों से निकलने वाले रंग-बिरंगे डिजाइन सिर्फ कपड़ों पर ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी में भी आत्मनिर्भरता के नए रंग भर रहे हैं।
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स्थानीय स्तर पर महिलाएं समूह बनाकर सूट, दुपट्टे, कुशन कवर और अन्य कपड़ों पर केलिको प्रिंटिंग कर रही हैं। इन उत्पादों की बाजार में मांग भी धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे महिलाओं को नियमित आमदनी होने लगी है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि समाज में उनकी पहचान भी बन रही है।
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इस कार्य से जुड़ी सुनीता देवी बताती हैं कि पहले वह सिर्फ घर के कामकाज तक ही सीमित थीं। हैंडलूम विभाग की ओर से जब इस काम की ट्रेनिंग मिली तो शुरुआत में थोड़ा डर लगा, लेकिन अब हम खुद डिजाइन बनाते हैं और अपने उत्पाद बेचते भी हैं। इससे हर महीने अच्छी आमदनी हो रही है और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
रीना देवी का कहना है कि केलिको प्रिंटिंग सीखने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। रीना बताती हैं कि पहले समय खाली चला जाता था, लेकिन अब हम कुछ नया सीख रहे हैं और उससे कमाई भी कर रहे हैं। हमारे बनाए डिजाइन लोगों को पसंद आ रहे हैं, इससे और मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है। (संवाद)
समूह में काम करने से मिलती है नई ताकत
पूजा देवी कहती हैं कि समूह में काम करने से महिलाओं को एक-दूसरे से सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे उत्पादों को बड़ा बाजार मिले और सरकार की ओर से और सहयोग मिले तो यह काम कई और महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महिलाओं की यह पहल न केवल रोजगार का माध्यम बन रही है, बल्कि पारंपरिक हस्तकला को भी नया जीवन दे रही है। मेहनत और लगन से काम कर रही ये महिलाएं अब दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। सांबा की इन महिलाओं के हाथों से निकलने वाले रंग-बिरंगे डिजाइन सिर्फ कपड़ों पर ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी में भी आत्मनिर्भरता के नए रंग भर रहे हैं।