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Jammu News: एनडीपीएस मामले में सबूतों में खामियों के चलते दो आरोपी बरी
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एक महत्वपूर्ण मामले में अनिल वर्मा निवासी जख तथा साहिल शर्मा निवासी राया सुचानी, तहसील विजयपुर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 2019 में थाना घगवाल में दर्ज एफआईआर से संबंधित था। इसमें आरोपियों के कब्जे से नशीले कैप्सूल बरामद होने का दावा किया गया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाका चेकिंग के दौरान आरोपियों से कुल 150 नशीले कैप्सूल बरामद किए थे।
हालांकि सुनवाई के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। कोर्ट ने पाया कि तलाशी के दौरान आरोपियों को मजिस्ट्रेट या गजटेड अधिकारी के सामने तलाशी का विकल्प नहीं दिया गया। इसके अलावा मौके पर मौजूद होने के बावजूद किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच और जब्ती प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इससे मामले की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। इन कमियों के चलते अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में सजा के लिए मजबूत और संदेह से परे साक्ष्य आवश्यक होते हैं, जो इस मामले में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाका चेकिंग के दौरान आरोपियों से कुल 150 नशीले कैप्सूल बरामद किए थे।
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हालांकि सुनवाई के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। कोर्ट ने पाया कि तलाशी के दौरान आरोपियों को मजिस्ट्रेट या गजटेड अधिकारी के सामने तलाशी का विकल्प नहीं दिया गया। इसके अलावा मौके पर मौजूद होने के बावजूद किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच और जब्ती प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इससे मामले की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। इन कमियों के चलते अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में सजा के लिए मजबूत और संदेह से परे साक्ष्य आवश्यक होते हैं, जो इस मामले में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
