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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Kulgam Killings: Killings that began with Kashmiri Pandits have now extended to migrant workers

Kulgam Killing: कश्मीरी पंडितों से शुरू हत्याएं बाहरी मजदूरों तक पहुंचीं, 36 साल में बदलती रही दहशत की रणनीति

Sat, 01 Aug 2026 01:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 01 Aug 2026 01:03 AM IST
सार

टारगेट किलिंग की घटनाएं 1990 के दशक में आतंकवाद के उभार के साथ शुरू हुईं, जब आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों, सरकारी कर्मचारियों, बुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया।

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Kulgam Killings: Killings that began with Kashmiri Pandits have now extended to migrant workers
बदलती फिजाओं के दावों पर सवाल करती हैं ऐसी घटनाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बात 90 के दशक की है। घाटी में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर शुरू हुई टारगेट किलिंग ऐसा नासूर बना जो आज बाहरी राज्यों से रोजी-रोटी की तलाश में आने वाले मजदूरों की जिंदगी तबाह कर रहा है। टारगेट किलिंग की घटनाएं 1990 के दशक में आतंकवाद के उभार के साथ शुरू हुईं, जब आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों, सरकारी कर्मचारियों, बुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया।

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वर्ष 2000 के बाद सुरक्षा अभियानों से टारगेट किलिंग में कमी आई, लेकिन समय-समय पर राजनीतिक नेताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों पर हमले जारी रहे। वर्ष 2021 से टारगेट किलिंग के मामले बढ़े। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों में चिंता बढ़ा दी।
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इसके जवाब में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद विरोधी अभियान तेज किए, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई और कई आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त किए। बावजूद छिटपुट टारगेट किलिंग की घटनाएं पूरी तरह नहीं थमी हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 31 जुलाई को कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों पर किया गया जानलेवा हमला है, जिसमें दीपक की मौत हो गई और भूपेंद्र जीएमसी अनंतनाग में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
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1989 से 2000 के बीच कश्मीर घाटी की प्रमुख घटनाएं ...

  • 14 सितंबर 1989 : भाजपा नेता और अधिवक्ता टीका लाल टपलू की श्रीनगर में हत्या।
  • 04 नवंबर 1989 : सेवानिवृत्त न्यायाधीश नीलकंठ गंजू की हत्या।
  • 13 फरवरी 1990 : दूरदर्शन श्रीनगर के निदेशक लासा कौल की हत्या।
  • 1990 के दौरान शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और कश्मीरी पंडित परिवारों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद घाटी से कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ।
  • 1990 के दशक से 2000 के बीच आतंकियों ने अंतराल पर अल्पसंख्यक समुदायों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों पर हमला जारी रखा। कई सामूहिक हत्याएं भी हुईं।

2021 से टारगेट किलिंग का नया दौर
साल 2021 में आतंकियों ने फिर से गैर स्थानीय मजदूरों, शिक्षकों, कश्मीरी पंडितों और व अन्य समुदाय के लोगों को निशाना बनाया।

  • अक्तूबर 2021 : श्रीनगर में स्कूल की प्रधानाचार्य सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की हत्या।
  • अक्तूबर 2021 : प्रसिद्ध कश्मीरी फार्मासिस्ट माखन लाल बिंदरू की हत्या।
  • मई 2022 : बडगाम में राजस्व विभाग के कर्मचारी राहुल भट की हत्या।
  • मई 2022 : कुलगाम में शिक्षिका रजनी बाला की हत्या।
  • जून 2022 : बैंक प्रबंधक विजय कुमार (राजस्थान निवासी) की कुलगाम में हत्या।

2023 से 2026 तक छिटपुट घटनाएं 
इस अवधि में भी छिटपुट आतंकी हमले हुए। हालांकि 2021–22 जैसी लगातार टारगेट किलिंग की शृंखला नहीं रही। अप्रैल 2025 में पहलगाम-बैसरन में पर्यटकों पर बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई। लेकिन इसे आतंकी हमला मानते हुए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। घुटनों पर ला दिया।

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